रांची सदर अस्पताल में 8 में से 4 कियोस्क महीनों से खराब: करीब 24 लाख की डिजिटल मशीनें बेकार, मरीज फिर कतार में लगने को मजबूर
सदर अस्पताल में रोज करीब 2 हजार मरीज पहुंचते हैं; बंद कियोस्क से डॉक्टर-रोस्टर और दवाओं की जानकारी नहीं मिल रही, टोकन मशीनें बंद होने से 30 मिनट से ज्यादा कतार

रांची। सदर अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए लगाई गई डिजिटल व्यवस्था लंबे समय से परेशानी का कारण बनी हुई है। अस्पताल में करीब दो साल पहले लगाए गए 8 कियोस्क में 4 पिछले कई महीनों से बंद पड़े हैं। वहीं, जो 4 कियोस्क चालू हैं, उनमें भी डॉक्टरों की उपलब्धता, साप्ताहिक रोस्टर और दवाओं से जुड़ी जानकारी अपडेट नहीं है।
अस्पताल में रोजाना करीब 2 हजार मरीज इलाज और जांच के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में डिजिटल कियोस्क और टोकन मशीनें बंद होने से मरीजों को डॉक्टर, विभाग और दवा काउंटर की जानकारी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
कियोस्क पर करीब 20 लाख रुपए खर्च
अस्पताल में लगाए गए प्रत्येक कियोस्क की कीमत करीब 2.50 लाख रुपए बताई गई है। इस हिसाब से 8 कियोस्क की कुल लागत करीब 20 लाख रुपए है।
इन कियोस्क का उद्देश्य मरीजों को अस्पताल में उपलब्ध डॉक्टरों, विभागों, रोस्टर और दवाओं समेत जरूरी जानकारी एक ही जगह उपलब्ध कराना था। लेकिन 4 मशीनें महीनों से बंद होने और चालू मशीनों में भी जानकारी अपडेट नहीं होने से इसका उद्देश्य प्रभावित हो रहा है।
कियोस्क के मेंटेनेंस की जिम्मेदारी ओडिशा की एडसोफ्ट टेक्नोलॉजी के पास है। नियम के मुताबिक शिकायत मिलने के एक महीने के भीतर खराब मशीन को ठीक किया जाना चाहिए।
4 लाख की टोकन मशीनें भी महीनों से बंद
कियोस्क के अलावा अस्पताल में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत करीब 4 लाख रुपए की लागत से दो टोकन मशीनें लगाई गई थीं। इनमें से एक मशीन OPD रजिस्ट्रेशन काउंटर और दूसरी पैथोलॉजी विभाग के पास स्थापित की गई थी।
इन मशीनों का उद्देश्य मरीजों को आसानी से टोकन उपलब्ध कराना था। मशीन से करीब 2 मिनट में टोकन मिलने की व्यवस्था थी, लेकिन दोनों मशीनें महीनों से बंद हैं।
इसके चलते मरीजों को अब सामान्य रजिस्ट्रेशन काउंटर पर लंबी कतार में खड़ा होना पड़ रहा है। कई बार पर्ची बनवाने में 30 मिनट से ज्यादा समय लग जाता है।
सुबह से लग जाती है लंबी कतार
टोकन मशीनों के बंद रहने का सबसे ज्यादा असर OPD और पैथोलॉजी रजिस्ट्रेशन पर दिखाई देता है। सुबह से ही काउंटर पर मरीजों की लंबी लाइन लग जाती है।
मरीजों का कहना है कि अगर टोकन मशीनें चालू हों तो पर्ची बनवाने की प्रक्रिया काफी आसान हो सकती है। लंबी कतार के कारण मरीजों के बीच कई बार विवाद की स्थिति भी बन जाती है।
मरीज बोले- बीमार हूं, ज्यादा देर खड़ा नहीं रह सकता
चर्च रोड निवासी आरव कुमार पैथोलॉजी में ब्लड टेस्ट कराने पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि पर्ची बनवाने के लिए लंबी लाइन लगी है। बीमारी की वजह से ज्यादा देर तक खड़े रहना मुश्किल है।
उनका कहना था कि पास में टोकन मशीन लगी हुई है, लेकिन वह बंद है। मशीन चालू होती तो कुछ ही मिनट में टोकन मिल जाता और जांच व डॉक्टर को दिखाने में भी समय बचता।
कियोस्क बंद होने से डॉक्टर और विभाग ढूंढना मुश्किल
कांटाटोली निवासी रवींद्र कुमार ने बताया कि वह अस्पताल में डॉक्टर और संबंधित विभाग की जानकारी लेने के लिए कियोस्क के पास पहुंचे थे, लेकिन मशीन बंद मिली।
उन्होंने कहा कि सही जानकारी नहीं मिलने पर मरीजों को अस्पताल में इधर-उधर भटकना पड़ता है। कई बार डॉक्टर या संबंधित विभाग खोजने में ही काफी समय निकल जाता है।
अस्पताल प्रशासन बोला- जल्द ठीक होंगी सभी मशीनें
सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. विमलेश सिंह ने कहा कि मरीजों को परेशानी न हो, इसके लिए अस्पताल में मौजूद सभी कियोस्क और टोकन मशीनों को जल्द से जल्द ठीक कराया जाएगा।
उन्होंने बताया कि मशीनों की समस्या की जानकारी संबंधित कंपनी को दी जाएगी। साथ ही अस्पताल में पूछताछ केंद्र भी बनाया गया है, जहां मरीज अस्पताल से संबंधित आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।




