संसद का मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, लोकसभा 1 मिनट तो राज्यसभा करीब 1 घंटे चली
आखिरी दिन पीएम मोदी, अमित शाह और राहुल गांधी सदन में मौजूद रहे; वंदे मातरम के बाद लोकसभा स्थगित, राज्यसभा में MMDR संशोधन बिल पारित

नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र गुरुवार को हंगामे और विरोध-प्रदर्शनों के बीच अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। सत्र के आखिरी दिन लोकसभा की कार्यवाही महज एक मिनट चली, जबकि राज्यसभा करीब एक घंटे तक चली। लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, पूरी केंद्रीय कैबिनेट और विपक्ष के नेता राहुल गांधी मौजूद रहे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने वंदे मातरम गान के बाद सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। दूसरी ओर राज्यसभा में कार्यवाही अपेक्षाकृत अधिक समय तक चली और आखिरी दिन MMDR संशोधन बिल पारित किया गया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सदन में हल्द्वानी में उनके कार्यक्रम के बाद कथित शुद्धिकरण का मुद्दा उठाया। मानसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार टकराव देखने को मिला और आखिरी दिन भी संसद परिसर में दोनों पक्षों के सांसदों ने अलग-अलग मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया। विपक्षी सांसद मंकी टॉय लेकर संसद परिसर में पहुंचे और नारेबाजी की, जबकि मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में प्रियंका गांधी, सुप्रिया सुले समेत कई विपक्षी सांसद मौजूद रहे। संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसद आमने-सामने भी आए। लोकसभा की कार्यवाही के आंकड़ों के अनुसार मानसून सत्र में कुल 19 बैठकें हुईं। सामान्य तौर पर एक बैठक में लंच ब्रेक को छोड़कर करीब छह घंटे कार्यवाही के लिए निर्धारित होते हैं। इस हिसाब से लगभग 114 घंटे काम होना था, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार लोकसभा में करीब 17 घंटे 30 मिनट ही कार्यवाही चल सकी, यानी करीब 96 घंटे 30 मिनट का समय हंगामे और अन्य कारणों से कार्यवाही में इस्तेमाल नहीं हो पाया। इससे पहले 2025 के मानसून सत्र में भी संसद की कार्यवाही काफी प्रभावित हुई थी। इस बार भी सत्र के दौरान विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्ष के विरोध और सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया के चलते कई बार सदन की कार्यवाही बाधित हुई। अब मानसून सत्र समाप्त होने के साथ ही राजनीतिक दलों का फोकस आगामी संसदीय और राजनीतिक गतिविधियों पर रहेगा, जबकि सत्र में कम कार्यवाही होने को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला आगे भी जारी रहने की संभावना है।




