प्रियंका गांधी के ‘गोमूत्र एक्सपर्ट’ बयान पर विवाद, ऑनलाइन मुहिम में 14 हजार लोगों का समर्थन
IIT मद्रास डायरेक्टर वी. कामकोटि के समर्थन में 38 से ज्यादा देशों के वैज्ञानिकों के जुड़ने का दावा; प्रियंका गांधी से बयान वापस लेने और माफी की मांग

नई दिल्ली: IIT मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि को लेकर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी की लोकसभा में की गई टिप्पणी पर विवाद बढ़ गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रियंका गांधी के बयान के विरोध में Change.org पर एक ऑनलाइन मुहिम शुरू की गई है, जिसे 13 अगस्त सुबह तक करीब 14 हजार लोगों का समर्थन मिलने का दावा किया गया है। अभियान में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मामले का संज्ञान लेने और प्रियंका गांधी से अपनी टिप्पणी वापस लेने तथा माफी मांगने की अपील की गई है। आयोजकों के अनुसार, 38 से अधिक देशों में रहने वाले भारतीय वैज्ञानिकों ने भी इस मुहिम का समर्थन किया है। विवाद उस समय शुरू हुआ जब एंटी पेपर लीक बिल पर लोकसभा में चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने IIT मद्रास के निदेशक का नाम लिए बिना सरकार की एक नई कमेटी में शामिल लोगों पर टिप्पणी करते हुए ‘गोमूत्र विशेषज्ञ’ का उल्लेख किया और शिक्षा के क्षेत्र में ऐसे व्यक्ति की विशेषज्ञता पर सवाल उठाया। अभियान चलाने वालों ने इस टिप्पणी को व्यक्तिगत और अपमानजनक बताते हुए कहा है कि किसी वैज्ञानिक या शिक्षाविद् के काम और विचारों की आलोचना तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए, व्यक्तिगत टिप्पणी के जरिए नहीं। आयोजकों का कहना है कि उनका अभियान किसी राजनीतिक दल, सरकार या विचारधारा के समर्थन अथवा विरोध में नहीं है, बल्कि सार्वजनिक जीवन और संसद में सम्मानजनक भाषा तथा तथ्य आधारित बहस को बढ़ावा देना इसका उद्देश्य है। इस बीच प्रो. वी. कामकोटि का वर्ष 2025 का एक वीडियो भी चर्चा में रहा था, जिसमें उन्होंने गोमूत्र में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण होने का दावा किया था और इसे कुछ बीमारियों के उपचार से जोड़ा था। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि उन्होंने अपने दावे के समर्थन में जून 2021 में प्रकाशित एक शोध लेख का हवाला दिया था, जिसमें गाय के मूत्र में पाए जाने वाले विभिन्न एंडोजिनस पेप्टाइड्स की प्रोफाइलिंग से संबंधित शोध का उल्लेख था। हालांकि किसी शोध में किसी जैविक पदार्थ के घटकों या संभावित जैविक गतिविधियों की पहचान होना अपने आप में किसी बीमारी के इलाज की चिकित्सकीय पुष्टि नहीं माना जाता। इस विवाद के बीच 215 मौजूदा और पूर्व कुलपतियों तथा शिक्षाविदों की ओर से भी प्रियंका गांधी को पत्र लिखे जाने की बात सामने आई है। पत्र में कहा गया कि राजनीतिक और वैचारिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन किसी शिक्षाविद् या वैज्ञानिक पर सार्वजनिक टिप्पणी करते समय तथ्यों और व्यक्ति की गरिमा का ध्यान रखा जाना चाहिए। पूरे विवाद ने संसद में राजनीतिक बहस की भाषा, वैज्ञानिक दावों और सार्वजनिक जीवन में व्यक्तिगत टिप्पणियों की सीमाओं को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।




