बेअंत सिंह हत्याकांड के दोषी जगतार सिंह हवारा ने 2 दिन की पैरोल ठुकराई
बीमार मां से मिलने के लिए नियमित पैरोल की मांग, हाई-रिस्क कैदी होने के कारण दिल्ली जेल प्रशासन ने दी थी सीमित पैरोल

नई दिल्ली: पूर्व पंजाब मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे जगतार सिंह हवारा ने दिल्ली जेल विभाग की ओर से दी गई दो दिन की पैरोल लेने से इनकार कर दिया है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक हवारा ने अपनी बीमार मां से मिलने के लिए नियमित पैरोल देने की मांग की थी, लेकिन जेल प्रशासन की ओर से उसे बताया गया कि उसे हाई-रिस्क कैदी की श्रेणी में रखा गया है और जेल से बाहर ले जाने की स्थिति में उसकी सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की जरूरत होगी। इसी वजह से उसे ज्यादा दिनों की पैरोल देना संभव नहीं बताया गया। इसके बाद हवारा ने दो दिन की पैरोल लेने से इनकार कर दिया। हवारा 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ के सिविल सेक्रेटेरिएट के प्रवेश द्वार पर हुए बम विस्फोट के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है। इस विस्फोट में तत्कालीन पंजाब मुख्यमंत्री बेअंत सिंह समेत 17 लोगों की मौत हुई थी। मामले में हवारा को पहले मौत की सजा सुनाई गई थी, जिसे बाद में हाईकोर्ट ने उम्रकैद में बदल दिया। वहीं दूसरी ओर तमिलनाडु को कावेरी नदी का पानी दिए जाने के विरोध में कन्नड़ संगठनों ने गुरुवार को कर्नाटक बंद का आह्वान किया। बंद का सबसे ज्यादा असर मांड्या में देखने को मिला, जहां किसानों और प्रदर्शनकारियों ने विरोध करते हुए सड़क जाम की। बेंगलुरु, मैसूर और अन्य बड़े शहरों में बंद का असर अपेक्षाकृत कम रहा और बस, टैक्सी, दुकानें तथा स्कूल सामान्य रूप से चलते रहे। प्रदर्शनकारियों ने कर्नाटक सरकार से तमिलनाडु को अतिरिक्त कावेरी पानी नहीं देने की मांग की। बंद के आयोजक वटाल नागराज को पुलिस ने एहतियातन हिरासत में लिया, जबकि कई अन्य प्रदर्शनकारियों को भी अलग-अलग जगहों पर हिरासत में लिए जाने की जानकारी है। कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से तमिलनाडु को 15 दिनों तक 12 हजार क्यूसेक पानी देने के निर्देश का कर्नाटक में विरोध किया जा रहा है। दोनों घटनाक्रमों में एक ओर जहां हवारा की पैरोल से जुड़ा फैसला चर्चा में है, वहीं कावेरी जल बंटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद ने एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक तनाव बढ़ा दिया है।




