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क्या देवदत्त पडिक्कल बनेंगे भारत के अगले द्रविड़-पुजारा? नंबर-3 पर लगातार दो शतक, श्रीलंका सीरीज में 328 रन

लगातार दो टेस्ट शतक लगाकर देवदत्त पडिक्कल ने नंबर-3 पर मजबूत दावेदारी पेश की; श्रीलंका सीरीज में 328 रन और स्पिन के खिलाफ शानदार बैकफुट गेम ने बढ़ाई उम्मीदें, अब द्रविड़-पुजारा की विरासत संभालने की चुनौती

स्पोर्ट्स डेस्क। भारतीय टेस्ट टीम में नंबर-3 की लंबे समय से चली आ रही तलाश को देवदत्त पडिक्कल ने श्रीलंका के खिलाफ शानदार प्रदर्शन के बाद नई दिशा दे दी है। 26 वर्षीय बल्लेबाज ने सीरीज में लगातार दो शतक लगाकर चयनकर्ताओं के सामने अपनी मजबूत दावेदारी पेश की है।

पडिक्कल ने गॉल टेस्ट में 167 रन और कोलंबो टेस्ट में 117 रन की शानदार पारियां खेलीं। पूरी सीरीज में उन्होंने भारत की ओर से सर्वाधिक 328 रन बनाए और प्लेयर ऑफ द सीरीज का पुरस्कार हासिल किया। खास बात यह रही कि उनके 123 रन स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ आए।

पुजारा के बाद लगातार बदले नंबर-3 के बल्लेबाज

चेतेश्वर पुजारा के 2023 में टेस्ट क्रिकेट से बाहर होने के बाद भारत नंबर-3 की पोजिशन पर लगातार प्रयोग करता रहा है। शुभमन गिल, विराट कोहली, केएल राहुल, साई सुदर्शन, करुण नायर और वॉशिंगटन सुंदर जैसे खिलाड़ियों को इस स्थान पर मौका मिला, लेकिन कोई भी लंबे समय तक अपनी जगह पक्की नहीं कर सका।

पुजारा ने भारत के लिए नंबर-3 पर 155 पारियों में 6529 रन बनाए थे। उनसे पहले राहुल द्रविड़ लंबे समय तक इस पोजिशन की जिम्मेदारी संभालते रहे और इस स्थान पर 10 हजार से ज्यादा रन बनाए।

अब पडिक्कल ने अपने शुरुआती मौकों में ही जिस तरह का प्रदर्शन किया है, उससे नंबर-3 की समस्या का स्थायी समाधान मिलने की उम्मीद बढ़ी है।

चोटिल साई सुदर्शन की जगह मिला मौका

श्रीलंका दौरे से पहले साई सुदर्शन के चोटिल होने के कारण पडिक्कल को टीम में शामिल किया गया। इससे पहले भी उन्होंने घरेलू क्रिकेट और भारत A के लिए शानदार प्रदर्शन किया था।

2025-26 के फर्स्ट-क्लास सीजन में पडिक्कल ने 812 रन बनाए थे। इस दौरान उन्होंने ऑस्ट्रेलिया A के खिलाफ 150 रन और रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल में 232 रन की बड़ी पारियां खेलीं।

श्रीलंका में टेस्ट सीरीज से पहले टूर गेम में भी उन्होंने 142 रन की नाबाद पारी खेलकर अपनी तैयारी का संकेत दे दिया था।

श्रीलंका सीरीज में 109 से ज्यादा का औसत

पडिक्कल ने गॉल टेस्ट की पहली पारी में 167 रन बनाए। दूसरी पारी में उन्होंने 44 रन जोड़े। इसके बाद कोलंबो टेस्ट में 117 रन की पारी खेली।

इस तरह उन्होंने सीरीज में कुल 328 रन बनाए और उनका बल्लेबाजी औसत 109.33 रहा। लगातार दो टेस्ट मैचों में शतक लगाना उनके अंतरराष्ट्रीय करियर के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है।

स्पिन के खिलाफ खास बैकफुट गेम

पडिक्कल की बल्लेबाजी की सबसे बड़ी खासियत श्रीलंका में स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ उनका बैकफुट गेम रहा। उन्होंने अच्छी लेंथ की गेंदों पर भी पीछे जाकर कट, पंच और पुल जैसे शॉट लगाए।

श्रीलंका सीरीज में स्पिन के खिलाफ उनकी करीब 37.4 प्रतिशत गेंदें बैकफुट से खेली गईं। कोलंबो टेस्ट में 117 रन की पारी के दौरान भी उन्होंने स्पिन के खिलाफ बैकफुट से 52 रन बनाए।

करीब 6 फीट 3 इंच की लंबाई भी उन्हें स्पिन के खिलाफ गेंद की लेंथ को जल्दी पढ़ने और पीछे जाकर शॉट खेलने में मदद करती है।

पडिक्कल और साई सुदर्शन में मुकाबला

नंबर-3 की दौड़ में साई सुदर्शन भी प्रमुख दावेदार हैं। दोनों बल्लेबाज स्पिन की लेंथ गेंदों के खिलाफ बैकफुट पर खेलने की क्षमता रखते हैं।

हालांकि, बैकफुट से रन बनाने की गति में पडिक्कल फिलहाल आगे नजर आते हैं। श्रीलंका सीरीज में उनके आक्रामक स्ट्रोक-प्ले ने उन्हें इस पोजिशन के लिए मजबूत विकल्प बना दिया है।

घरेलू क्रिकेट में भी शानदार रिकॉर्ड

पडिक्कल ने जूनियर क्रिकेट से ही अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। 2018 की कूच बिहार ट्रॉफी में उन्होंने 829 रन बनाए थे। इसके बाद 2019-20 विजय हजारे ट्रॉफी में 609 रन बनाकर टूर्नामेंट के शीर्ष रन स्कोरर बने।

IPL में भी उनका प्रदर्शन चर्चा में रहा है। उन्होंने 2020 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए डेब्यू किया और अपने पहले ही सीजन में 473 रन बनाए। 2021 में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ उन्होंने नाबाद 101 रन की पारी खेलकर अपना पहला IPL शतक लगाया।

2025 और 2026 में RCB की खिताबी टीम का हिस्सा रहते हुए भी उन्होंने अहम योगदान दिया।

द्रविड़ और पुजारा की विरासत की चुनौती

नंबर-3 पर द्रविड़ और पुजारा जैसे बल्लेबाजों ने भारतीय टेस्ट क्रिकेट में लंबे समय तक भरोसेमंद बल्लेबाजी की। ऐसे में पडिक्कल के सामने सिर्फ रन बनाने की नहीं, बल्कि इस महत्वपूर्ण पोजिशन पर निरंतरता साबित करने की चुनौती होगी।

श्रीलंका के खिलाफ दो लगातार शतक निश्चित रूप से शानदार शुरुआत हैं, लेकिन भारत के अगले टेस्ट मुकाबलों में उन्हें इसी प्रदर्शन को दोहराना होगा।

फिलहाल पडिक्कल ने नंबर-3 की रेस में खुद को सबसे आगे जरूर कर लिया है। अगर वह घरेलू क्रिकेट में अपने रिकॉर्ड और श्रीलंका जैसी स्पिन-फ्रेंडली परिस्थितियों में मिली सफलता को आगे भी कायम रखते हैं, तो भारतीय टेस्ट टीम को लंबे समय बाद नंबर-3 पर एक स्थायी बल्लेबाज मिल सकता है।

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