14 करोड़ की साइबर ठगी में ग्वालियर की फर्जी सिम का कनेक्शन
12 राज्यों के 50 से ज्यादा शहरों में 180 लोग बने शिकार; 110 से ज्यादा फर्जी सिम का खुलासा, 200 से 500 रुपए में एक्टिवेटेड सिम बेचने का आरोप।

ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में फर्जी सिम कार्ड के जरिए देशभर में साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस के मुताबिक ग्वालियर के अलग-अलग सिम वेंडरों से जारी की गई 110 से ज्यादा फर्जी सिम का इस्तेमाल 12 राज्यों में 180 लोगों को ठगने के लिए किया गया और इन मामलों में 14 करोड़ 20 लाख रुपए से ज्यादा की रकम ठगे जाने की जानकारी सामने आई है। NCRP डेटा के विश्लेषण के बाद पुलिस ने फर्जी सिम जारी करने वाले वेंडरों तक पहुंचने के लिए ‘ऑपरेशन फास्ट’ शुरू किया। जांच के दौरान सामने आया कि अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच लोगों के दस्तावेज और बायोमेट्रिक लेकर उनकी जानकारी के बिना मोबाइल सिम जारी की गईं, जबकि इन नंबरों का इस्तेमाल दिसंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच साइबर ठगी में किया गया। पुलिस के अनुसार फर्जी सिम का नेटवर्क मध्यप्रदेश के अलावा उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, महाराष्ट्र, दिल्ली, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, बिहार, केरल, चंडीगढ़ और हरियाणा तक फैला हुआ था और 50 से ज्यादा शहरों में इन नंबरों का इस्तेमाल ठगी के लिए किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ वेंडर कथित तौर पर महज 200 से 500 रुपए में एक्टिवेटेड सिम बिचौलियों के माध्यम से साइबर ठगों के एजेंटों को उपलब्ध करा देते थे। सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि जिन लोगों के नाम पर ये सिम जारी की गईं, उनमें से कई लोगों को इस बात की जानकारी तक नहीं थी कि उनके दस्तावेजों पर मोबाइल नंबर सक्रिय किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक कई लोगों ने सिम पोर्ट कराने के नाम पर वेंडरों को अपने दस्तावेज और बायोमेट्रिक उपलब्ध कराए थे, जिसका कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया गया। जांच में मोहना क्षेत्र के लाखन धाकड़ और सोनू धाकड़ तथा महाराजपुरा क्षेत्र के संदीप राजावत सहित अन्य वेंडरों के नाम सामने आए हैं। पुलिस का कहना है कि फर्जी सिम के आधार पर जांच करने पर कई बार ऐसे निर्दोष लोग जांच के दायरे में आ जाते थे, जिनके नाम पर मोबाइल नंबर दर्ज होता था लेकिन उन्हें ठगी की कोई जानकारी नहीं होती थी। इसी वजह से वास्तविक फर्जी सिम नेटवर्क और साइबर ठगों तक पहुंचने के उद्देश्य से ‘ऑपरेशन फास्ट’ शुरू किया गया। पुलिस अब तक पांच वेंडरों को नामजद कर पांच FIR दर्ज कर चुकी है और 27 अगस्त को दो वेंडरों के खिलाफ आखिरी FIR दर्ज की गई। अब जांच का अगला फोकस बिचौलियों और उन साइबर अपराधियों तक पहुंचना है, जिन्होंने इन फर्जी सिम का इस्तेमाल कर देशभर में करोड़ों रुपए की ठगी को अंजाम दिया। मामले ने एक बार फिर मोबाइल सिम जारी करने की प्रक्रिया में दस्तावेज और बायोमेट्रिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।




