बिहार में फर्जी मेडिकल रिसर्च का कथित नेटवर्क
इन्वेस्टिगेशन में एजेंटों के जरिए पैसे लेकर MD, MS समेत मेडिकल डिग्री के लिए रिसर्च और थीसिस तैयार कराने के गंभीर आरोप सामने आए हैं।

बिहार में मेडिकल छात्रों के लिए कथित तौर पर फर्जी रिसर्च और थीसिस तैयार कराने का एक नेटवर्क सामने आने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अंडरकवर जांच में 50 से अधिक एजेंटों और प्रोफेसरों से संपर्क किया गया, जिनमें कुछ लोगों ने पैसे लेकर 50 या 100 मरीजों के आंकड़ों पर कथित फर्जी रिसर्च तैयार करने की बात कही। दावा है कि इस नेटवर्क के जरिए बिहार के अलावा झारखंड, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, असम, पश्चिम बंगाल और नेपाल समेत कई जगहों के मेडिकल छात्रों को सेवाएं दी जा रही थीं। एक एजेंट के मुताबिक MD की थीसिस करीब 50 हजार रुपए में तैयार कराने और सिनॉप्सिस के लिए अलग से 5 हजार रुपए लेने की बात सामने आई। एजेंट ने यह भी दावा किया कि अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों के प्रोफेसर इस काम से जुड़े हैं और छात्र ऑनलाइन ऑर्डर देकर थीसिस तैयार करवा सकते हैं। रिपोर्ट में एक प्रोफेसर से कथित बातचीत का भी जिक्र है, जिसमें टॉपिक मिलने के बाद सिनॉप्सिस और थीसिस तैयार करने की बात कही गई। इस पूरे मामले में सबसे गंभीर सवाल यह है कि यदि मेडिकल डिग्री हासिल करने के लिए जरूरी रिसर्च वास्तव में किए बिना केवल कागजों पर तैयार की जा रही है, तो इससे मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता, रिसर्च की विश्वसनीयता और मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। खास तौर पर फर्जी मरीजों के आंकड़े, बिना वास्तविक अध्ययन के रिसर्च और अकादमिक प्रक्रिया में कथित पैसों के लेन-देन जैसे आरोपों की स्वतंत्र जांच जरूरी है। हालांकि, साझा की गई सामग्री मुख्य रूप से अंडरकवर बातचीत और संबंधित लोगों के दावों पर आधारित है; इसमें किसी न्यायिक या आधिकारिक जांच के अंतिम निष्कर्ष का उल्लेख नहीं है। इसलिए सामने आए आरोपों की पुष्टि संबंधित मेडिकल संस्थानों, विश्वविद्यालयों और जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बाद ही पूरी तरह हो सकेगी।




