सुखदेव भगत बने छत्तीसगढ़ कांग्रेस के नए प्रभारी, सचिन पायलट को पंजाब की कमान
भूपेश बघेल को पंजाब से हटाकर असम की जिम्मेदारी, चन्नी गुट की नाराजगी के बीच कांग्रेस हाईकमान का बड़ा संगठनात्मक फेरबदल; नए प्रभारियों के सामने गुटबाजी खत्म कर संगठन मजबूत करने की चुनौती

कांग्रेस हाईकमान ने पार्टी संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए झारखंड के लोहरदगा से सांसद सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ कांग्रेस का नया प्रभारी नियुक्त किया है, जबकि छत्तीसगढ़ के प्रभारी रहे सचिन पायलट को अब पंजाब की जिम्मेदारी सौंपी गई है और पंजाब के प्रभारी भूपेश बघेल को वहां से हटाकर असम का महासचिव प्रभारी बनाया गया है। पार्टी के इस बदलाव को आगामी चुनावों की तैयारियों और राज्यों में संगठनात्मक संतुलन साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। पंजाब में लंबे समय से कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थक नेताओं की नाराजगी के बीच यह फेरबदल हुआ है। चन्नी गुट की ओर से लगातार यह आरोप लगाया जा रहा था कि पंजाब के प्रभारी के तौर पर भूपेश बघेल प्रदेश संगठन की जमीनी स्थिति और पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों को हाईकमान तक प्रभावी तरीके से नहीं पहुंचा रहे थे। इस खेमे की मांग थी कि पंजाब में संगठन को मजबूत करने के लिए प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष दोनों स्तर पर बदलाव किया जाए। अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद पर दोबारा ताजपोशी के बाद चन्नी समर्थकों की नाराजगी और खुलकर सामने आई थी। पार्टी के अंदरूनी विरोध के दौरान कई संगठनात्मक बैठकों में नारेबाजी, हंगामे और नेताओं के बीच टकराव की खबरें सामने आई थीं। 31 जुलाई से 8 अगस्त के बीच चलाए गए ‘हर बूथ, कांग्रेस मजबूत’ अभियान के दौरान भी यह खींचतान सार्वजनिक रूप से दिखाई दी। फतेहगढ़ साहिब से शुरू हुए अभियान में चन्नी और उनके समर्थक नेताओं की दूरी के बाद संगरूर और पटियाला में भी विरोध देखने को मिला। इसके बाद मुक्तसर, बठिंडा और बरनाला जैसे मालवा क्षेत्र के जिलों में भी बघेल के दौरे के दौरान विरोध की स्थिति बनी। लुधियाना में 6 अगस्त को आयोजित संगठनात्मक बैठक के दौरान विरोध और ज्यादा तीखा हो गया था। ऐसे घटनाक्रम के बाद पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक नेतृत्व को लेकर हाईकमान पर दबाव बढ़ने की चर्चा थी। 3 सितंबर को दिल्ली में पंजाब कांग्रेस से जुड़े वरिष्ठ नेताओं और राहुल गांधी की टीम के बीच बैठक हुई, जिसमें प्रदेश में गुटबाजी और संगठन की स्थिति पर चर्चा होने की जानकारी सामने आई। इसके अगले दिन भी संगठनात्मक स्तर पर बैठकों का दौर जारी रहा। चन्नी गुट से जुड़े नेता राणा गुरजीत सिंह की कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और बाद में सचिन पायलट से मुलाकात भी इसी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच हुई। राणा गुरजीत के मुताबिक पायलट से मुलाकात में पंजाब को लेकर चर्चा हुई थी, हालांकि उस समय उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि पायलट को पंजाब का प्रभारी बनाया जा रहा है। अब पायलट को पंजाब की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस के भीतर चल रहे अलग-अलग गुटों को एक मंच पर लाने की होगी। पंजाब कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और अन्य वरिष्ठ नेताओं के बीच राजनीतिक मतभेद लंबे समय से पार्टी के लिए चुनौती बने हुए हैं। ऐसे में हाईकमान ने राजस्थान में संगठनात्मक राजनीति और गुटीय संघर्ष का अनुभव रखने वाले सचिन पायलट को पंजाब की जिम्मेदारी देकर एक ऐसे नेता को आगे किया है, जिनसे संगठन में संवाद और समन्वय स्थापित करने की उम्मीद की जा रही है। पायलट की राजनीतिक छवि अपेक्षाकृत युवा और संगठन पर पकड़ रखने वाले नेता की रही है और कांग्रेस को उम्मीद होगी कि वह पंजाब में कार्यकर्ताओं के साथ संवाद बढ़ाकर पार्टी की चुनावी तैयारी को गति दे सकेंगे। दूसरी ओर, भूपेश बघेल को असम का महासचिव प्रभारी बनाया गया है। पंजाब से हटाए जाने के बाद उन्हें नई जिम्मेदारी ऐसे समय मिली है, जब कांग्रेस अलग-अलग राज्यों में अपने संगठन को चुनावी दृष्टि से सक्रिय करने की कोशिश कर रही है। छत्तीसगढ़ में अब सुखदेव भगत के सामने संगठन को मजबूत करने की चुनौती होगी। सुखदेव भगत का राजनीतिक सफर काफी लंबा रहा है। 22 अक्टूबर 1960 को लोहरदगा में जन्मे भगत ने दिल्ली विश्वविद्यालय से एमए की पढ़ाई की और राजनीति में आने से पहले राज्य प्रशासनिक सेवा में कार्य किया। उन्होंने 2005 में सरकारी नौकरी छोड़कर विधानसभा चुनाव लड़ा और लोहरदगा से विधायक चुने गए। मई 2013 में उन्हें झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया। बाद में वे भाजपा में भी शामिल हुए और 2019 में विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन जनवरी 2022 में कांग्रेस में वापस लौट आए। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें लोहरदगा से उम्मीदवार बनाया और उन्होंने जीत हासिल कर पहली बार लोकसभा में प्रवेश किया। संगठन में उनकी सक्रियता को देखते हुए 2025 में उन्हें झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा से जुड़े संसदीय कार्यों की जिम्मेदारी दी गई थी और अप्रैल 2025 में उन्हें AICC ऑब्जर्वर भी बनाया गया था। अब छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनने के बाद उन्हें प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, विधायकों, पदाधिकारियों और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना होगा। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सत्ता से बाहर होने के बाद संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी के सामने बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने, कार्यकर्ताओं को जोड़ने और आगामी चुनावों के लिए मजबूत रणनीति तैयार करने की चुनौती है। सचिन पायलट के कार्यकाल के दौरान छत्तीसगढ़ संगठन से जुड़े कई मुद्दों पर काम हुआ था, लेकिन अब नए प्रभारी के आने से संगठनात्मक रणनीति में बदलाव की संभावना भी देखी जा रही है। सुखदेव भगत प्रदेश के नेताओं के साथ बैठक कर संगठन की स्थिति, क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरण, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और आगामी चुनावी तैयारियों की समीक्षा कर सकते हैं। कांग्रेस के इस फेरबदल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पार्टी ने एक साथ तीन राज्यों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया है। पंजाब में पायलट को भेजना जहां गुटबाजी से निपटने और संगठन को एकजुट करने की कोशिश माना जा रहा है, वहीं छत्तीसगढ़ में सुखदेव भगत की नियुक्ति का उद्देश्य संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना और वरिष्ठ नेताओं के बीच समन्वय बढ़ाना हो सकता है। भूपेश बघेल को असम की जिम्मेदारी देकर पार्टी ने उनके राजनीतिक अनुभव का दूसरे राज्य में इस्तेमाल करने का फैसला किया है। आने वाले समय में इन बदलावों का वास्तविक असर पार्टी की बैठकों, संगठनात्मक नियुक्तियों, कार्यकर्ता सक्रियता और चुनावी रणनीति में दिखाई देगा। खासतौर पर पंजाब में पायलट के सामने चन्नी गुट और वड़िंग समर्थक खेमे के बीच संतुलन बनाना तथा छत्तीसगढ़ में सुखदेव भगत के सामने कांग्रेस संगठन को एकजुट कर चुनावी मैदान के लिए तैयार करना सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती होगी।




