UP के कांवड़िए की अनोखी आस्था: कीलों पर लेटकर दंडौती कांवड़ से हरिद्वार से अलीगढ़ पहुंचा, राहगीर भी रह गए हैरान
कीलों पर लेटकर दंडौती कांवड़ से हरिद्वार से अलीगढ़ पहुंचा, राहगीर भी रह गए हैरान

कांवड़ यात्रा के दौरान हरिद्वार में आस्था की एक अनोखी तस्वीर देखने को मिली, जहां उत्तर प्रदेश का एक कांवड़िया बेहद कठिन तरीके से दंडौती कांवड़ यात्रा करता नजर आया। हरिद्वार से गंगाजल लेकर अलीगढ़ की ओर रवाना हुए इस कांवड़िए ने सामान्य तरीके से पैदल चलने के बजाय कीलों पर लेटकर अपनी यात्रा पूरी करने का रास्ता चुना। उसकी इस कठिन और जोखिम भरी यात्रा को देखने के लिए रास्ते में मौजूद लोग रुक गए और कई लोगों ने इस दृश्य को अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड किया। दंडौती कांवड़ यात्रा में श्रद्धालु शरीर को जमीन पर दंडवत करते हुए आगे बढ़ता है और इसी प्रक्रिया को दोहराते हुए लंबी दूरी तय करता है। इस कांवड़िए ने अपनी धार्मिक आस्था को अलग अंदाज में व्यक्त करते हुए कीलों का इस्तेमाल किया, जिससे यात्रा और भी कठिन और चुनौतीपूर्ण नजर आई। हरिद्वार से अलीगढ़ तक की दूरी तय करने के दौरान उसे रास्ते में कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा होगा, लेकिन उसकी श्रद्धा और संकल्प ने लोगों का ध्यान खींचा। कांवड़ यात्रा के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचते हैं और अपनी मान्यताओं के अनुसार गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर रवाना होते हैं। कोई पैदल यात्रा करता है तो कोई कठिन तपस्या और अलग-अलग धार्मिक परंपराओं के माध्यम से भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करता है। इस कांवड़िए की दंडौती यात्रा भी इसी धार्मिक आस्था की एक अनोखी तस्वीर बनकर सामने आई। हालांकि कीलों पर लेटकर यात्रा करना बेहद जोखिम भरा हो सकता है और इससे गंभीर चोट लगने की आशंका रहती है, इसलिए ऐसी किसी भी गतिविधि को बिना विशेषज्ञ या चिकित्सकीय सलाह के दोहराना उचित नहीं है। हरिद्वार में सामने आया यह दृश्य फिलहाल कांवड़ यात्रा की उन अलग-अलग परंपराओं और आस्था के तरीकों को दिखाता है, जिनके जरिए शिवभक्त अपने आराध्य के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं।



