भोपाल के रहवासी इलाकों में कारोबार पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई टली: 62,500 प्रतिष्ठानों को लेकर आज फैसला आने की थी उम्मीद, निगम का एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल
भोपाल में आवासीय इलाकों के 62,500 प्रतिष्ठानों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली, नगर निगम की कार्रवाई रिपोर्ट पहले ही दाखिल

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के रहवासी इलाकों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को होने वाली सुनवाई टल गई। संबंधित जस्टिस के अवकाश पर होने के कारण अब मामले की सुनवाई बाद में होगी। नई तारीख फिलहाल तय नहीं की गई है।
भोपाल के आवासीय क्षेत्रों में करीब 62,500 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को लेकर कोर्ट के फैसले का इंतजार किया जा रहा था। नगर निगम की ओर से अब तक की कार्रवाई की एक्शन टेकन रिपोर्ट भी कोर्ट में दाखिल की जा चुकी है। दूसरी ओर, रहवासियों ने निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए अपने दस्तावेज और आपत्तियां कोर्ट के सामने रखी हैं।
62,500 प्रतिष्ठानों में से 8,084 को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट के 5 अगस्त के आदेश के बाद भोपाल नगर निगम ने आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वाले प्रतिष्ठानों को नोटिस देना शुरू किया था।
करीब 15 दिनों तक नोटिस देने की कार्रवाई चली। इस दौरान सूची में शामिल 62,500 प्रतिष्ठानों में से 8,084 को नोटिस जारी किए गए।
इसके बाद निगम ने करीब तीन दिनों तक कार्रवाई करते हुए 190 प्रतिष्ठानों को बंद कराया था।
व्यापारियों के विरोध के बाद सीलिंग की कार्रवाई रुकी
नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई के विरोध में व्यापारियों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया था। व्यापारियों के सड़क पर उतरने के बाद नगर निगम की कार्रवाई रोक दी गई।
पिछले करीब 15 दिनों से सीलिंग की कार्रवाई नहीं हुई है।
व्यापारी जहां कार्रवाई को लेकर विरोध जता रहे हैं, वहीं रहवासियों का आरोप है कि निगम की कार्रवाई समान रूप से नहीं हो रही।
रहवासियों ने निगम की रिपोर्ट पर जताई आपत्ति
मामले में याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने नगर निगम की एक्शन टेकन रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के समक्ष ऐसे दस्तावेज पेश किए गए हैं, जिनके आधार पर निगम की कार्रवाई पर सवाल उठते हैं।
रहवासियों का दावा है कि जिन कुछ प्रतिष्ठानों को सील किया गया था, वे बाद में दोबारा खुल गए। इसी को लेकर उन्होंने निगम की कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठाया है।
क्या है पूरा मामला?
भोपाल में आवासीय भवनों के व्यावसायिक इस्तेमाल और अवैध निर्माण से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। अगस्त के पहले सप्ताह में हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार की ओर से गठित 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।
कोर्ट ने दुकान संचालकों को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से मिले विभिन्न राहत आदेशों पर भी रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया था कि उसके निर्देश पर चल रही जांच में किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए।
इसके बाद नगर निगम को शहर में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश करनी थी। इसी प्रक्रिया के तहत नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई शुरू की गई थी।
अब निगम अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर चुका है, जबकि रहवासी पक्ष की ओर से भी रिपोर्ट पर आपत्तियां और दस्तावेज रखे गए हैं।
रहवासियों की क्या मांग है?
रहवासियों का कहना है कि आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को बंद किया जाना चाहिए। उनकी प्रमुख आपत्तियां हैं:
- रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों से शोर और भीड़ बढ़ती है।
- कमर्शियल गतिविधियों के कारण सार्वजनिक शांति और क्षेत्र का सामान्य वातावरण प्रभावित होता है।
- बढ़ती गतिविधियों के साथ सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी सामने आती हैं।
- स्कूलों के आसपास व्यावसायिक गतिविधियों और बढ़ते ट्रैफिक से बच्चों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ने की आशंका है।
- बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के कारण आवासीय क्षेत्रों में ट्रैफिक और पार्किंग की समस्या बढ़ती है।
अरेरा कॉलोनी से उठा था मामला
भोपाल के पॉश इलाके अरेरा कॉलोनी में आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर विवाद प्रमुख रूप से सामने आया था। रहवासियों ने कई बड़े मॉल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की गतिविधियों पर आपत्ति जताई थी।
मामला बढ़ने के बाद रहवासी न्यायालय तक पहुंचे और अब सुप्रीम कोर्ट में इस पूरे विवाद पर सुनवाई चल रही है।




