नियम से अलग आवासीय प्रमाण-पत्र जारी करने पर डुमरी CO से स्पष्टीकरण: CEO ने 3 दिन में मांगा जवाब, SIR के लिए जारी दस्तावेज की होगी जांच
झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की समीक्षा; CEO K. रवि कुमार ने ERO-AERO को दस्तावेजों के सत्यापन में निर्धारित प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए

रांची। झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बीच गिरिडीह जिले के डुमरी अंचल कार्यालय से जारी एक आवासीय प्रमाण-पत्र की प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं। राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) के. रवि कुमार ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं और संबंधित अंचल अधिकारी से तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है।
मामला ऐसे प्रमाण-पत्र से जुड़ा है, जो कथित तौर पर SIR के लिए अलग प्रारूप में जारी किया गया था। CEO कार्यालय ने पूछा है कि निर्धारित सरकारी प्रक्रिया और प्रपत्र के बजाय अलग फॉर्म इस्तेमाल करने की जरूरत क्यों पड़ी और इसके लिए किसी सक्षम अधिकारी से अनुमति ली गई थी या नहीं।
वंशावली और पारिवारिक रिकॉर्ड के सत्यापन पर भी सवाल
जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि प्रमाण-पत्र जारी करने से पहले वंशावली या पारिवारिक सूची तैयार करने और उसके सत्यापन की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं।
CEO कार्यालय ने प्रमाण-पत्र जारी करने में संबंधित राजस्व अधिकारियों की भूमिका और दस्तावेजों की प्रक्रिया की भी जानकारी मांगी है। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अनुपालन रिपोर्ट पांच दिनों के भीतर देने को कहा गया है।
निर्धारित प्रक्रिया से बाहर जारी प्रमाण-पत्र मान्य नहीं
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि चुनावी प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले प्रमाण-पत्र सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्धारित सरकारी प्रक्रिया और स्वीकृत प्रारूप में जारी होने चाहिए। निर्धारित प्रक्रिया से अलग जारी किए गए प्रमाण-पत्रों को निर्वाचन प्रक्रिया में मान्य नहीं माना जाएगा।
झारखंड सरकार के आधिकारिक JharSewa पोर्टल के अनुसार, आवासीय प्रमाण-पत्र राजस्व विभाग के तहत दी जाने वाली वैधानिक सेवा है और इसके लिए निर्धारित आवेदन तथा दस्तावेजों की प्रक्रिया मौजूद है।
राज्यभर के चुनाव अधिकारियों को दी गई ट्रेनिंग
CEO के. रवि कुमार ने SIR को लेकर राज्यभर के ERO, AERO और अतिरिक्त AERO के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए समीक्षा और प्रशिक्षण बैठक की। इसमें दावा-आपत्तियों के निपटारे, दस्तावेजों के सत्यापन और प्रक्रिया को एक समान तरीके से लागू करने पर जोर दिया गया।
बैठक में UIDAI के रांची क्षेत्रीय कार्यालय के निदेशक नीरज कुमार ने आधार सत्यापन से जुड़े तकनीकी और प्रक्रियात्मक पहलुओं की जानकारी भी दी।
SIR के लिए नया आवासीय प्रमाण-पत्र बनवाने की जरूरत नहीं
CEO के. रवि कुमार पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि SIR के लिए अलग से नया जाति या आवासीय प्रमाण-पत्र बनवाने की आवश्यकता नहीं है। मतदाता निर्धारित प्रक्रिया के तहत सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी वैध दस्तावेज और उपलब्ध रिकॉर्ड प्रस्तुत कर सकते हैं।
बुजुर्ग, दिव्यांग और गर्भवती महिलाओं को प्राथमिकता
SIR से जुड़े काम में CEO ने अधिकारियों को दावा-आपत्तियों का पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से निपटारा करने के निर्देश दिए हैं। भीड़ और लंबी कतारों से बचने के लिए टोकन व्यवस्था अपनाने तथा बुजुर्गों, दिव्यांगों और गर्भवती महिलाओं को प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया गया है।
जनजातीय समुदाय से जुड़े दस्तावेजों के सत्यापन में सरकारी कार्यालयों में उपलब्ध पुराने रिकॉर्ड का उपयोग करने की सलाह दी गई है, ताकि दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया में आवश्यक सहायता मिल सके।




