बीकानेर जिला अस्पताल में बनेगा लेवल-3 ट्रॉमा सेंटर, 10 बेड ICU-OT से मिलेगी त्वरित राहत
पश्चिम बीकानेर और हाईवे क्षेत्र की 10 लाख आबादी को फायदा, अब हर गंभीर मरीज को PBM नहीं भेजना पड़ेगा

बीकानेर के पश्चिम विधानसभा क्षेत्र और नेशनल हाईवे के आसपास रहने वाली करीब 10 लाख आबादी के लिए राहत की बड़ी खबर है। जिला अस्पताल (एसडीएम) में जल्द ही लेवल-3 ट्रॉमा केयर फैसिलिटी सेंटर शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए अस्पताल प्रशासन ने प्रस्ताव चिकित्सा शिक्षा निदेशालय को भेज दिया है।
150 बेड क्षमता वाले इस जिला अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर बनने के बाद सड़क हादसों में घायल मरीजों को तत्काल इलाज मिल सकेगा। इससे न केवल पश्चिमी बीकानेर, बल्कि जैसलमेर और पूगल रोड हाईवे पर होने वाले हादसों के घायलों को भी समय रहते बेहतर उपचार उपलब्ध हो सकेगा।
6 करोड़ की लागत से बनेगा ट्रॉमा सेंटर
अस्पताल परिसर में ही करीब 6 करोड़ रुपए की लागत से इस ट्रॉमा सेंटर के लिए अलग भवन बनाया जाएगा। इसमें 10 बेड, एक ICU और एक ऑपरेशन थिएटर (OT) की सुविधा होगी। सेंटर के शुरू होने के बाद गंभीर मरीजों को प्राथमिक स्तर पर ही विशेषज्ञ इलाज मिल सकेगा।
PBM अस्पताल का कम होगा दबाव
इस ट्रॉमा सेंटर के शुरू होने से PBM अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर पर मरीजों का दबाव कम होगा। अभी पश्चिम बीकानेर और हाईवे क्षेत्र के अधिकतर गंभीर घायलों को PBM अस्पताल रेफर करना पड़ता है, जिससे समय भी लगता है और मरीजों की स्थिति बिगड़ने का खतरा बना रहता है।
अब जिला अस्पताल में ही क्रिटिकल मरीजों को ICU और OT की सुविधा मिलने से उन्हें तत्काल उपचार मिल सकेगा।
ट्रैफिक जाम में नहीं फंसेंगे घायल
Dr. Surendra Kumar Verma ने बताया कि जिला अस्पताल के लिए लेवल-3 ट्रॉमा सेंटर का प्रस्ताव भेजा गया है। ICU और OT की सुविधा होने से गंभीर मरीजों को वहीं संभाला जा सकेगा। इसके लिए नए उपकरणों की सूची भी तैयार कर ली गई है।
वहीं Dr. Sunil Harsh ने कहा कि शहर के विस्तार के साथ जिला अस्पताल पर दबाव बढ़ा है। 150 बेड क्षमता के साथ अस्पताल तैयार है। ट्रॉमा सेंटर बनने से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि सड़क हादसों के घायलों को शहर के ट्रैफिक और रेलवे फाटकों के जाम में फंसकर समय बर्बाद नहीं करना पड़ेगा।
हाईवे हादसों में बढ़ेगी जीवन बचाने की संभावना
लेवल-3 ट्रॉमा सेंटर बनने से हाईवे और शहरी क्षेत्र में होने वाले हादसों के घायलों को “गोल्डन ऑवर” के भीतर उपचार मिल सकेगा। इससे गंभीर घायलों की जान बचाने की संभावना पहले से कहीं अधिक बढ़ जाएगी।
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