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देशनोक अग्निकांड में 11 लाख भुगतान पर उठे सवाल, नगर निगम की भूमिका संदेहों में

निजी वेयरहाउस की आग के बाद सीमा से बाहर कार्रवाई और सुपरफास्ट भुगतान पर प्रशासन घिरा

 

बीकानेर | देशनोक में 8 मार्च को एक निजी वेयरहाउस में लगी भीषण आग का मामला अब केवल अग्निकांड नहीं, बल्कि प्रशासनिक और वित्तीय सवालों का केंद्र बनता जा रहा है। 33 हजार बोरियों के जलने की इस घटना के बाद अब नगर निगम की भूमिका, 11 लाख रुपए के भुगतान और सीमा से बाहर जाकर की गई कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मामले में यह चर्चा भी सामने आई कि आईपीएल मैच के दौरान पटाखों की चिंगारी से आग लगी, लेकिन घटनाक्रम और प्रशासनिक कार्रवाई इस दावे पर कई संदेह खड़े कर रही है।

घटना देशनोक क्षेत्र की है, जो प्रशासनिक रूप से नगर पालिका सीमा में आता है। इसके बावजूद बीकानेर नगर निगम द्वारा वहां जाकर निजी वेयरहाउस की बिल्डिंग गिराने का काम कराया गया और इस पर करीब 11 लाख रुपए खर्च किए गए। नियमों के अनुसार किसी नगरपालिका क्षेत्र में होने वाले कार्यों की जिम्मेदारी स्थानीय निकाय की होती है, जबकि निजी संपत्ति के मलबे को हटाने या जर्जर भवन गिराने का खर्च भवन मालिक से वसूला जाता है। ऐसे में नगर निगम द्वारा अपनी सीमा से बाहर जाकर सरकारी धन से यह कार्य कराना सवालों के घेरे में है।

मामले को और संदिग्ध तब माना जा रहा है जब आग बुझाने के बाद बिल्डिंग ध्वस्तीकरण के लिए नियुक्त फर्म को तीन दिन तक काम नहीं करने दिया गया। इसके बाद अचानक कार्रवाई तेज हुई और बिल्डिंग गिराने की प्रक्रिया पूरी कर दी गई। फायर एक्सपर्ट्स के अनुसार यदि पटाखों की चिंगारी से आग लगती, तो आग का फैलाव व्यापक होता, लेकिन यहां केवल एक हिस्से में भारी नुकसान और आसपास का माल लगभग सुरक्षित बचा रहना कई तकनीकी शंकाएं पैदा करता है। इससे आग की प्रकृति और कारणों को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

विवाद का एक बड़ा बिंदु नगर निगम की प्रशासनिक प्रक्रिया भी है। बताया जा रहा है कि नगर निगम कमिश्नर के आदेश में न तो जारी करने की स्पष्ट तारीख दर्ज है और न ही टेंडर जमा करने की अंतिम तिथि का उल्लेख। इसके बाद 27 मार्च को अधिशाषी अभियंता के हस्ताक्षर से चेकलिस्ट जारी होती है और कुछ ही दिनों में 11 लाख रुपए का भुगतान भी कर दिया जाता है। इस तेज भुगतान प्रक्रिया ने फाइलों की पारदर्शिता और टेंडर प्रक्रिया की वैधता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जब इस मामले में संभागीय आयुक्त एवं नगर निगम प्रशासक विश्राम मीणा से सवाल किया गया तो उन्होंने प्रारंभिक प्रतिक्रिया में देशनोक में नगर निगम की कार्रवाई को असंभव बताया। दस्तावेज सामने आने के बाद उन्होंने मामले को गंभीर बताते हुए जांच की बात कही। अब यह मामला केवल आगजनी तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि नगर निगम की कार्यप्रणाली, अधिकार क्षेत्र, भुगतान प्रक्रिया और संभावित मिलीभगत जैसे बड़े सवालों से जुड़ गया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह केवल एक अग्निकांड था या इसके पीछे स्टॉक, बीमा और साक्ष्यों से जुड़ा कोई बड़ा खेल छिपा है। नगर निगम द्वारा सीमा से बाहर जाकर निजी संपत्ति पर सरकारी धन खर्च करना, बिना स्पष्ट तारीख के आदेश, त्वरित भुगतान और साक्ष्यों के संभावित नुकसान जैसे बिंदुओं ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। अब निगाहें जिला प्रशासन और संभागीय स्तर की जांच पर टिकी हैं।

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