झारखंड में जल्द होगा 1.24 लाख करोड़ का एमओयू
नई औद्योगिक और टेक्सटाइल नीति पर निवेशकों से राय लेकर सरकार तेज करेगी औद्योगिक विकास

रांची: झारखंड सरकार राज्य में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने की तैयारी में जुट गई है। मुख्यमंत्री Hemant Soren की दावोस और यूनाइटेड किंगडम यात्रा के दौरान मिले 1.24 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों को अब धरातल पर उतारने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राज्य सरकार जल्द ही निवेशक कंपनियों के साथ एमओयू (समझौता ज्ञापन) करेगी।
दिल्ली में होगी निवेशकों संग राउंड टेबल बैठक
एमओयू से पहले उद्योग विभाग नई दिल्ली में निवेशकों और स्टेकहोल्डर्स के साथ राउंड टेबल बैठक करेगा। इस बैठक में राज्य की नई औद्योगिक और टेक्सटाइल नीति पर कंपनियों से सुझाव लिए जाएंगे। यह बैठक जून के अंतिम सप्ताह में प्रस्तावित है। वहीं आईटी विभाग भी दिल्ली में आईटी सेक्टर में बड़े निवेश को लेकर अलग कार्यक्रम आयोजित करेगा।
पिछले साल 15 एमओयू प्रस्तावित, एक भी नहीं हुआ
राज्य सरकार ने पिछले साल 15 एमओयू की रूपरेखा तैयार की थी। इनसे करीब 31 हजार करोड़ रुपए के निवेश और लगभग 20 हजार लोगों को रोजगार मिलने की संभावना थी। लेकिन एक भी एमओयू पर काम आगे नहीं बढ़ सका। इन प्रस्तावित समझौतों में एसएम स्टील एंड पावर, वोल्टोक्स रेल, इंडियन स्टील एंड वायर, गजानन फेरो, जय सस्पेंशन, UltraTech Cement, रामकृष्णा फोर्जिंग, सुप्रीम मेटल्स एक्सपोर्ट, बीएमडब्ल्यू इंडस्ट्री और रश्मि मेटालिक्स जैसी कंपनियां शामिल थीं।
बिहार से बेहतर औद्योगिक नीति बनाने की तैयारी
झारखंड सरकार अब बिहार से बेहतर औद्योगिक और निवेश प्रोत्साहन नीति तैयार करने में जुटी है। पिछले साल दिसंबर में विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह ने उद्योग विभाग को बिहार से बेहतर नीति तैयार करने का निर्देश दिया था। बिहार में अगस्त 2025 में लागू औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज को फिलहाल निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक माना जा रहा है। झारखंड सरकार उसी मॉडल का अध्ययन कर अपनी नई नीति को और प्रभावी बनाने की तैयारी में है।
2015 से 2024 तक 316 एमओयू, लेकिन जमीनी हकीकत कमजोर
झारखंड में 2015 से 2024 के बीच कुल 316 एमओयू हुए। हालांकि इनमें से बड़ी संख्या में निवेश प्रस्ताव कागजों तक ही सीमित रह गए। 2015 से 2021 के बीच हुए करीब 60 प्रतिशत एमओयू पर काम शुरू नहीं हो सका। वहीं 2004 से 2014 के बीच हुए 74 एमओयू में से 24 कंपनियों के समझौते सरकार को रद्द करने पड़े थे।
वर्षवार एमओयू के आंकड़े
2015 – 11
2016 – 05
2017 – 241
2018 – 18
2019 – 14
2020 – 02
2021 – 03
2022 – 03
2023 – 03
2024 – 16
झारखंड सरकार इस बार निवेश प्रस्तावों को सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रखना चाहती। नई औद्योगिक नीति, टेक्सटाइल सेक्टर में सुधार और आईटी निवेश को जोड़कर सरकार रोजगार और औद्योगिक विस्तार का नया मॉडल तैयार करने में जुटी है।
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