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जातीय जनगणना में सरना धर्म कोड का अलग कॉलम देने की मांग

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल को पत्र लिखकर आदिवासी धार्मिक पहचान की सुरक्षा पर जोर दिया

रांची: मुख्यमंत्री Hemant Soren ने जातीय जनगणना में सरना धर्म कोड के लिए अलग कॉलम देने की मांग को लेकर राष्ट्रपति Droupadi Murmu, प्रधानमंत्री Narendra Modi और राज्यपाल Santosh Kumar Gangwar को पत्र लिखा है। उन्होंने आदिवासी समुदाय के धार्मिक अस्तित्व और पहचान की रक्षा के लिए इस पर सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया है।

आदिवासी धार्मिक पहचान की रक्षा का मुद्दा
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि देश का आदिवासी समुदाय कई वर्षों से अपने धार्मिक अस्तित्व की रक्षा के लिए सरना धर्म को अलग पहचान देने की मांग कर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वंचित वर्गों के कल्याण की तरह आदिवासी समाज के समेकित विकास के लिए भी सरना धर्म कोड का प्रावधान करेंगे।

2011 जनगणना में 50 लाख लोगों ने लिखा था ‘सरना’
मुख्यमंत्री ने पत्र में याद दिलाया कि वर्ष 2011 की जनगणना में अलग कोड नहीं होने के बावजूद 21 राज्यों के लगभग 50 लाख लोगों ने धर्म के कॉलम में स्वप्रेरणा से ‘सरना’ दर्ज कराया था। उन्होंने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि जनगणना 2027 के दूसरे चरण के प्रपत्र में सरना धर्म और अन्य समान धार्मिक व्यवस्थाओं के लिए अलग कोड का प्रावधान किया जाए।

दिल्ली पहुंचे मुख्यमंत्री, शीर्ष नेताओं से मुलाकात संभव
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रविवार को दिल्ली रवाना हो गए। माना जा रहा है कि वे वहां राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से मुलाकात कर सरना धर्म कोड के मुद्दे पर चर्चा कर सकते हैं।

2020 में विधानसभा से पारित हो चुका है प्रस्ताव
झारखंड सरकार ने 11 नवंबर 2020 को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर सरना धर्म कोड को जनगणना में शामिल करने का प्रस्ताव पारित किया था। इस प्रस्ताव को सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों का समर्थन मिला था। विधानसभा से पारित होने के बाद राज्य सरकार ने इसे केंद्रीय गृह मंत्रालय और रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया को मंजूरी के लिए भेजा था।

पांच साल बाद भी केंद्र में लंबित है मामला
विधानसभा से प्रस्ताव पारित हुए पांच वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन मामला अब तक केंद्र सरकार के पास लंबित है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कई बार दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात कर इस पर शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह किया था।

डिजिटल जनगणना में अलग कोड से बेहतर होगा डेटा संकलन
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि इस बार जनगणना डिजिटल माध्यम से होगी, जिससे अलग धर्म कोड के आंकड़ों का बेहतर और सटीक संकलन संभव हो सकेगा। उन्होंने कहा कि राज्य की नीतियां और योजनाएं स्थानीय समाज, विशेषकर आदिवासी समुदाय की सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विशिष्टताओं को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। ऐसे में सरना धर्म को अलग पहचान देना आवश्यक है।

आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान बचाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में कहा कि संविधान के तहत आदिवासी समाज की सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान की रक्षा जरूरी है। वहीं राज्यपाल से आग्रह किया गया कि वे इस मुद्दे को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के समक्ष उठाकर सकारात्मक पहल करें।

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