5 सेकेंड में ₹1 लाख उड़ाए, FIR 5 दिन में: साइबर फ्रॉड में अपराधी तेज, पुलिस कार्रवाई अब भी धीमी; हाईकोर्ट भी लगा चुका फटकार
; हाईकोर्ट भी लगा चुका फटकार
इंदौर। साइबर अपराधियों के लिए किसी व्यक्ति के बैंक खाते से पैसा निकालना अब कुछ ही सेकेंड का काम रह गया है, लेकिन शिकायत के बाद पुलिस की कार्रवाई में कई दिन लगने से पीड़ितों की परेशानी बढ़ जाती है। साइबर फ्रॉड के मामलों में पैसा कुछ सेकेंड में ट्रांसफर हो जाता है, जबकि FIR दर्ज होने में कई दिन लगने के आरोप सामने आते रहे हैं।
ऐसे मामलों में शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं, क्योंकि समय रहते संबंधित बैंक और डिजिटल पेमेंट सिस्टम को सूचना मिलने पर संदिग्ध लेनदेन को रोकने या रकम फ्रीज कराने की संभावना बढ़ सकती है।
5 सेकेंड में खाते से निकल गए ₹1 लाख
साइबर ठगी के मामलों में अपराधी फर्जी लिंक, OTP, फर्जी कस्टमर केयर नंबर, डिजिटल अरेस्ट, निवेश के झांसे और अन्य तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं।
कई मामलों में पीड़ित के खाते से रकम कुछ ही सेकेंड में दूसरे खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है। इसके बाद रकम कई खातों के जरिए आगे भेजे जाने से उसकी रिकवरी और मुश्किल हो सकती है।
FIR में देरी से बढ़ती है परेशानी
साइबर अपराध की शिकायत मिलने के बाद तत्काल कार्रवाई जरूरी होती है। लेकिन यदि शिकायत दर्ज करने और FIR की प्रक्रिया में कई दिन लगते हैं तो पुलिस के सामने रकम के ट्रेल को पकड़ने और उसे फ्रीज कराने की चुनौती बढ़ जाती है।
पीड़ितों का आरोप है कि कई बार उन्हें साइबर पोर्टल, बैंक और पुलिस के बीच चक्कर लगाने पड़ते हैं।
हाईकोर्ट भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा चुका
साइबर अपराधों में पुलिस की धीमी कार्रवाई को लेकर अदालतें भी कई मौकों पर चिंता जता चुकी हैं। ऐसे मामलों में अदालतों ने पुलिस और संबंधित एजेंसियों से शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई करने तथा पीड़ितों की मदद सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।
साइबर अपराध में पहले कुछ घंटे इसलिए महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में भेजकर अपराधी उसकी पहचान और रिकवरी मुश्किल कर सकते हैं।
साइबर ठगी होने पर तुरंत क्या करें?
अगर आपके खाते से धोखाधड़ी से पैसा निकल गया है तो इंतजार न करें।
- तुरंत बैंक को सूचना देकर संदिग्ध ट्रांजेक्शन की जानकारी दें।
- साइबर फ्रॉड की शिकायत 1930 पर करें।
- राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
- ट्रांजेक्शन ID, बैंक स्टेटमेंट, मोबाइल नंबर, चैट और स्क्रीनशॉट जैसे सभी सबूत सुरक्षित रखें।
- OTP, PIN, CVV या बैंकिंग पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें।
पैसा वापस मिलने की संभावना समय पर शिकायत से बढ़ सकती है
ठगी की रकम वापस मिलना निश्चित नहीं होता, लेकिन जितनी जल्दी शिकायत की जाती है, उतनी जल्दी संबंधित बैंकिंग चैनल और जांच एजेंसियां रकम के प्रवाह को ट्रैक करने और संभावित रूप से उसे रोकने की कोशिश कर सकती हैं।
‘हमारे मठ’ की नजर
साइबर अपराध में अपराधी तकनीक की रफ्तार का फायदा उठा रहे हैं। ऐसे में पुलिस और बैंकिंग व्यवस्था की प्रतिक्रिया भी उतनी ही तेज होना जरूरी है। कुछ सेकेंड में होने वाली ठगी के मामलों में FIR और कार्रवाई में अनावश्यक देरी पीड़ित के नुकसान को बढ़ा सकती है। शिकायतों पर तत्काल प्रतिक्रिया और स्पष्ट जिम्मेदारी तय करना साइबर अपराध से निपटने की अहम जरूरत है।


