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हाईकोर्ट से जेडीए के लॉ डायरेक्टर को राहत, विभागीय कार्रवाई पर रोक

दो चार्जशीट के आधार पर कार्रवाई पर अंतरिम रोक; विधि सचिव और जेडीए आयुक्त समेत अधिकारियों से मांगा जवाब

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) में तैनात लॉ डायरेक्टर नरेंद्र कुमार आर्य को अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने उन्हें जारी दो चार्जशीट के आधार पर विभागीय कार्रवाई करने पर रोक लगा दी है। मामले में अदालत ने विधि एवं विधायी कार्य विभाग के अधिकारियों और जेडीए आयुक्त से जवाब मांगा है।

जस्टिस अनुरूप सिंघी की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को चार सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।

दो मामलों को लेकर जारी हुई थी चार्जशीट

याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट सुनील समदड़िया ने अदालत को बताया कि नरेंद्र कुमार आर्य वर्तमान में जेडीए में विधि निदेशक के पद पर कार्यरत हैं।

पहली चार्जशीट जेडीए कर्मचारी गौरव गुप्ता को बर्खास्त करने की सिफारिश से जुड़ी है। अधिवक्ता के अनुसार गुप्ता को जेडीए आयुक्त की मंजूरी के बाद बर्खास्त किया गया था। इसके बाद गुप्ता ने अपनी बर्खास्तगी को हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिस पर मामला अभी लंबित है।

दूसरी चार्जशीट हाईकोर्ट के एक आदेश की कथित अवमानना से संबंधित है। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि जिस एकलपीठ के आदेश से यह मामला जुड़ा है, उसके खिलाफ जेडीए की अपील पर खंडपीठ पहले ही रोक लगा चुकी है। ऐसे में अवमानना का आधार नहीं बनता।

विधि सचिव के अधिकार क्षेत्र पर भी सवाल

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में यह भी तर्क दिया गया कि नरेंद्र कुमार आर्य जेडीए में पदस्थापित हैं और विधि विभाग के प्रत्यक्ष प्रशासनिक नियंत्रण में नहीं आते।

इस आधार पर दलील दी गई कि प्रमुख विधि सचिव के पास उनके खिलाफ चार्जशीट जारी करने का प्रशासनिक क्षेत्राधिकार नहीं था।

जेडीए अधिनियम की धारा 78 का दिया हवाला

याचिकाकर्ता की ओर से जयपुर विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1982 की धारा 78 का भी हवाला दिया गया। इसमें नियमानुसार किए गए कार्यों के लिए अधिकारियों को कानूनी संरक्षण मिलने की बात कही गई है।

अदालत ने इन दलीलों पर विचार करते हुए फिलहाल दोनों चार्जशीट के आधार पर विभागीय कार्रवाई पर रोक लगा दी है।

चार सप्ताह में जवाब मांगा

हाईकोर्ट ने विधि एवं विधायी कार्य विभाग के प्रमुख सचिव, संयुक्त सचिव और जयपुर विकास प्राधिकरण के आयुक्त से मामले में जवाब मांगा है। कोर्ट ने संबंधित पक्षों को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

अदालत के इस अंतरिम आदेश के बाद नरेंद्र कुमार आर्य के खिलाफ 30 जुलाई 2026 को जारी दोनों चार्जशीट के आधार पर फिलहाल विभागीय कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकेगी।

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