JSSC-CGL रद्द होने के बाद छात्रों का आंदोलन 26वें दिन भी जारी: सफल अभ्यर्थी भी धरने पर बैठे, CBI जांच की मांग
JSSC-CGL रद्द होने से सफल अभ्यर्थियों में रोष, बारिश के बीच प्रोजेक्ट भवन के बाहर धरना; छात्र बोले- CBI जांच के बिना आंदोलन खत्म नहीं होगा

रांची। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन बुधवार को 26वें दिन भी जारी रहा। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्र सरकार के फैसले से संतुष्ट नजर आए, लेकिन CBI जांच की मांग पर अब भी अड़े हुए हैं।
वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने की घोषणा के बाद परीक्षा में सफल अभ्यर्थी भी प्रोजेक्ट भवन के बाहर धरने पर बैठ गए। इन अभ्यर्थियों ने नियुक्तियां रद्द किए जाने के फैसले पर विरोध जताते हुए अपने भविष्य को लेकर चिंता जाहिर की।
CM हाउस घेराव का कार्यक्रम स्थगित
JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच ने 20 अगस्त को प्रस्तावित मुख्यमंत्री आवास घेराव का कार्यक्रम फिलहाल स्थगित कर दिया है। मंच का कहना है कि मुख्यमंत्री के सकारात्मक रुख को देखते हुए यह फैसला लिया गया है, लेकिन आंदोलन समाप्त नहीं किया गया है।
मंच की मांगों में CBI जांच, भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और परीक्षा प्रणाली में सुधार शामिल हैं। छात्र नेताओं का कहना है कि CBI जांच की घोषणा होने तक आंदोलन जारी रहेगा। रूपेश पाल और सबीता का अनशन भी जारी बताया गया है।
रात में टेंट लगाने से पुलिस ने रोका
JSSC-CGL के सफल अभ्यर्थियों ने प्रोजेक्ट भवन से बिरसा चौक तक मोबाइल फ्लैश लाइट मार्च निकाला। इसके बाद वे देर रात प्रोजेक्ट भवन के गेट के सामने धरने पर बैठ गए।
अभ्यर्थियों ने रात में टेंट लगाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें टेंट लगाने से रोक दिया। इसके बाद बारिश के बीच कई अभ्यर्थी सड़क किनारे खुले में सोने को मजबूर हुए। आंदोलन को देखते हुए पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई और धुर्वा थाना पुलिस ने भी गश्त बढ़ाई।
‘कल तक सरकारी कर्मचारी थे, आज बेरोजगार हैं’
JSSC-CGL परीक्षा पास कर नियुक्ति पाने वाले अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा रद्द होने के बाद उनका भविष्य अनिश्चित हो गया है। उनका कहना है कि “कल तक हम सरकारी कर्मचारी थे, आज बेरोजगार हैं।”
अभ्यर्थी नियुक्तियों को रद्द किए जाने के फैसले का विरोध कर रहे हैं और न्याय के लिए कोर्ट जाने की बात कह रहे हैं।
छात्र नेताओं ने CBI जांच की मांग दोहराई
आंदोलनकारी छात्र सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले से खुश हैं, लेकिन उनका कहना है कि उनकी मुख्य मांग अभी पूरी नहीं हुई है।
छात्र नेता रवींद्र पासवान ने कहा कि सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन का अध्ययन किया जाएगा। जब तक CBI जांच की मांग पर सहमति नहीं बनती, आंदोलन जारी रहेगा।
CM ने रिटायर्ड जज की निगरानी में जांच की बात कही
कैबिनेट की विशेष बैठक के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि SIT और CID की जांच में कई तथ्य सामने आए हैं और मामले में अलग-अलग समय पर काम करने वाली कंपनियों का एक जटिल नेटवर्क शामिल है।
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2014 से अब तक आयोजित परीक्षाओं की CID से जांच कराने की बात कही है।
नियुक्त अभ्यर्थी भी आंदोलन में उतरे
JSSC-CGL के जिन सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति हो चुकी थी और जिन्होंने अपने पदों पर काम भी किया था, वे अब प्रोजेक्ट भवन के बाहर धरना दे रहे हैं। वे अपनी नियुक्तियों को लेकर स्पष्टता और न्याय की मांग कर रहे हैं।
कैबिनेट की बैठक के दौरान ही बड़ी संख्या में सफल अभ्यर्थी प्रोजेक्ट भवन के बाहर जुट गए थे। परीक्षा रद्द करने की घोषणा के बाद कई अभ्यर्थी भावुक होकर रो पड़े और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
कानूनी लड़ाई की तैयारी
हाईकोर्ट के अधिवक्ता विनोद सिंह ने कहा कि नियुक्ति के बाद बिना अभ्यर्थियों का पक्ष सुने नौकरी रद्द करना न्याय के विरुद्ध है। उनके अनुसार, सरकार ने कई महीनों तक अभ्यर्थियों को वेतन भी दिया है। ऐसे में फैसला एकपक्षीय होने का सवाल उठता है।
उन्होंने कहा कि प्रभावित अभ्यर्थियों के सामने हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी विकल्प खुले हैं।
फिलहाल झारखंड में JSSC-CGL को लेकर छात्र आंदोलन और सफल अभ्यर्थियों का विरोध दोनों जारी हैं। आंदोलनकारी छात्र CBI जांच की मांग पर कायम हैं, जबकि सफल अभ्यर्थी अपनी नियुक्तियों को लेकर न्याय की मांग कर रहे हैं।



