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उज्जैन

महाकाल मंदिर परिसर में आकार लेने लगा 1000 साल पुराना मंदिर

2020 की खुदाई में मिले थे परमारकालीन अवशेष; 37 फीट ऊंचे मंदिर का आधार तैयार, 2027 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य

उज्जैन। महाकालेश्वर मंदिर परिसर में करीब एक हजार साल पुराने मंदिर के अवशेषों से उसी स्थापत्य शैली में नए मंदिर का पुनर्निर्माण शुरू हो गया है। वर्ष 2020 में खुदाई के दौरान मिले प्राचीन अवशेषों के आधार पर तैयार किए जा रहे मंदिर का आधार लगभग पूरा हो चुका है।

मंदिर निर्माण का काम पुरातत्व विशेषज्ञों की देखरेख में चल रहा है। फिलहाल करीब 28 कारीगर रोजाना निर्माण कार्य में जुटे हैं। मंदिर को 2027 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

2020 में खुदाई के दौरान मिले थे अवशेष

महाकाल मंदिर विस्तारीकरण के पहले चरण के दौरान मई 2020 में खुदाई की जा रही थी। मुख्य मंदिर के सामने करीब 25 से 30 फीट नीचे खुदाई के दौरान प्राचीन मंदिर का ढांचा सामने आया था।

खुदाई में मंदिर का आधार भाग, प्राचीन शिवलिंग, नंदी, गणेश, मां चामुंडा और शार्दुल की मूर्तियां सहित कई स्थापत्य अवशेष मिले थे। इसके बाद खुदाई रोक दी गई थी। पुरातत्व विशेषज्ञों ने इन अवशेषों को परमारकालीन बताया था।

37 फीट ऊंचा होगा मंदिर

महाकाल मंदिर परिसर में मुख्य मंदिर के शिखर के सामने प्राचीन शैली में बनाए जा रहे शिव मंदिर की ऊंचाई करीब 37 फीट होगी। निर्माण पर लगभग 65 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है।

मंदिर का निर्माण प्राचीन अवशेषों और उपलब्ध स्थापत्य सामग्री के आधार पर किया जा रहा है। निर्माण पूरा होने के बाद यह परिसर के ऐतिहासिक और धार्मिक स्वरूप को और समृद्ध करेगा।

राजस्थान से बुलाए गए विशेषज्ञ कारीगर

मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए राजस्थान से विशेषज्ञ कारीगर बुलाए गए हैं। खुदाई के दौरान मिले पुराने पत्थरों को सुरक्षित रखते हुए निर्माण में इस्तेमाल किया जा रहा है।

जहां मूल पत्थर उपलब्ध नहीं हैं, वहां राजस्थान से बेसाल्ट पत्थर मंगवाए जा रहे हैं। इन पत्थरों को प्राचीन मंदिर की स्थापत्य शैली के अनुरूप आकार दिया जा रहा है।

पुराने अवशेषों की नंबरिंग कर तैयार हो रहा ढांचा

पुरातत्व विशेषज्ञों ने खुदाई में मिले स्तंभ, कुंभ भाग, आमलक और अन्य स्थापत्य अवशेषों का वर्गीकरण किया है। प्रत्येक अवशेष की नंबरिंग की गई है, ताकि उसे निर्माण के दौरान उसके मूल स्थान और संरचना के अनुरूप लगाया जा सके।

इस प्रक्रिया के जरिए प्राचीन अवशेषों को जोड़ते हुए मंदिर के ढांचे को उसके मूल स्वरूप के करीब तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।

करीब एक साल में पूरा करने का लक्ष्य

मंदिर के निर्माण का काम अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। आधार तैयार होने के बाद आगे की स्थापत्य संरचना पर काम किया जा रहा है। अधिकारियों और विशेषज्ञों का लक्ष्य है कि प्राचीन शैली में तैयार किया जा रहा यह मंदिर निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा हो जाए।

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