राजस्थान में UCC और ट्री प्रोटेक्शन एक्ट को मंजूरी, बिना अनुमति पेड़ काटने पर 1 लाख जुर्माना और 1 साल तक सजा
, बिना अनुमति पेड़ काटने पर 1 लाख जुर्माना और 1 साल तक सजा

जयपुर: पंचायत और निकाय चुनाव की आचार संहिता लागू होने से पहले राजस्थान सरकार की कैबिनेट बैठक में आमजन, पर्यावरण और सरकारी कर्मचारियों से जुड़े कई अहम फैसलों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने समान नागरिक संहिता (UCC) और ट्री राजस्थान प्रोटेक्शन एक्ट को मंजूरी दे दी है, जिन्हें 20 अगस्त से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में विधेयक के रूप में पेश किया जाएगा। सरकार के अनुसार UCC का उद्देश्य प्रदेश में एक समान कानूनी व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ना है। प्रस्तावित कानून में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े प्रावधानों को व्यवस्थित करने की बात कही गई है, जबकि आदिवासी और जनजातीय क्षेत्रों के पारंपरिक रीति-रिवाजों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। प्रस्ताव के अनुसार विवाह का रजिस्ट्रेशन 60 दिनों के भीतर कराना अनिवार्य होगा और लिव-इन रिलेशनशिप शुरू करने तथा समाप्त करने की जानकारी भी दर्ज करानी होगी। तलाक के रजिस्ट्रेशन का भी प्रावधान रखा गया है और निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करने पर 10 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान बताया गया है। वहीं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े ट्री राजस्थान प्रोटेक्शन एक्ट के तहत खेजड़ी और रोहिड़ा समेत कुल 29 प्रजातियों के पेड़ों को काटने पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। सरकार के मुताबिक विशेष परिस्थितियों में यदि किसी संरक्षित पेड़ को काटना जरूरी हो तो सक्षम अधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। अनुमति मिलने पर काटे गए पेड़ों की संख्या से 10 प्रतिशत अधिक पेड़ लगाने और उनके रखरखाव की व्यवस्था करनी होगी। यदि संबंधित व्यक्ति पेड़ लगाने में असमर्थता जताता है तो निर्धारित राशि जमा करानी होगी, जिसका उपयोग सरकार की ओर से पौधरोपण और उनके रखरखाव में किया जाएगा। बिना अनुमति संरक्षित पेड़ काटने पर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना और एक साल तक की सजा का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। यह कानून निजी भूमि पर भी लागू होगा, हालांकि प्रस्ताव में 500 मीटर तक की एक विशेष सीमा का उल्लेख किया गया है। कैबिनेट ने सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को प्रमोशन के लिए आवश्यक सेवा अवधि में दो वर्ष की छूट देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। सरकार ने इसकी घोषणा बजट में की थी, लेकिन कैबिनेट की मंजूरी लंबित होने के कारण अधिसूचना जारी नहीं हो पा रही थी। अब पिछले तीन वर्षों में इस छूट का लाभ नहीं लेने वाले पात्र कर्मचारियों को निर्धारित सेवा अवधि में दो साल की छूट मिलने का रास्ता साफ हो गया है। इन फैसलों के विधानसभा में पेश होने के बाद इनके प्रावधानों पर आगे चर्चा और विधायी प्रक्रिया पूरी होगी।




