Welcome to भगवा हिन्दुस्तान   Click to listen highlighted text! Welcome to भगवा हिन्दुस्तान
jaipur

राजस्थान में ST आरक्षण के भीतर ‘कोटे में कोटा’ पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब: भील समुदाय को 9% विशेष आरक्षण देने की मांग, 70 से ज्यादा जातियां प्रभावित हो सकती हैं

राजस्थान में ST आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण पर हाईकोर्ट का सरकार से जवाब तलब, याचिका में भील समुदाय को 12% कोटे में 9% अलग आरक्षण देने की मांग

जयपुर। राजस्थान में अनुसूचित जनजाति (ST) आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण यानी ‘कोटे में कोटा’ का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। एक याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव, प्रमुख कार्मिक सचिव, एसटी आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

याचिका में मांग की गई है कि ST वर्ग को मिलने वाले 12% आरक्षण में से 9% विशेष आरक्षण भील समुदाय के लिए निर्धारित किया जाए। याचिकाकर्ताओं ने इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के पंजाब राज्य बनाम देवेंद्र सिंह मामले में दिए फैसले का हवाला दिया है।

फिलहाल हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है। आगे इस मामले में सरकार का पक्ष और कोर्ट की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

किस आधार पर की गई है मांग?

याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि राज्य स्तर पर पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलने के कारण भील और सहरिया समुदाय को सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक पिछड़ेपन का सामना करना पड़ रहा है।

याचिका में यह भी दावा किया गया कि ST वर्ग में शामिल मीणा समुदाय आरक्षण का बड़ा हिस्सा हासिल कर रहा है और भील समुदाय को अपेक्षाकृत कम लाभ मिल रहा है। याचिकाकर्ताओं ने भील समुदाय के लिए ST कोटे के भीतर अलग आरक्षण की मांग की है।

याचिका पर सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि नेशनल ST आयोग ने राज्य सरकार को ST श्रेणी में उप-वर्गीकरण और सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने के संबंध में पत्र भेजा था।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले में क्या कहा गया?

याचिका में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का उल्लेख किया गया है, जिसमें SC/ST वर्ग के भीतर अलग-अलग जातियों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति समान नहीं होने की बात पर विचार किया गया था।

फैसले के अनुसार, राज्य सरकारें जरूरतमंद और अपेक्षाकृत अधिक पिछड़ी जातियों तक आरक्षण का लाभ पहुंचाने के लिए उप-वर्गीकरण पर विचार कर सकती हैं। हालांकि, इसके लिए मनमाने तरीके से निर्णय नहीं लिया जा सकता।

राज्य सरकार को संबंधित जातियों की स्थिति और आरक्षण में उनके प्रतिनिधित्व से जुड़े पर्याप्त आंकड़ों के आधार पर निर्णय लेना होगा। किसी एक जाति को पूरे SC/ST कोटे का लाभ देने जैसी व्यवस्था भी नहीं की जा सकती।

राजस्थान में 70 से ज्यादा जातियां प्रभावित हो सकती हैं

राजस्थान में SC और ST श्रेणी में कई जातियां और उपजातियां शामिल हैं। ऐसे में ST आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण लागू करने की स्थिति में अलग-अलग समुदायों के आरक्षण लाभ और प्रतिनिधित्व का अध्ययन करना पड़ेगा।

सरकार को इसके लिए संबंधित जातियों की सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक स्थिति और सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन करना पड़ सकता है।

सरकार के सामने कई चुनौतियां

ST आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण लागू करने की प्रक्रिया आसान नहीं होगी। सरकार को कई समुदायों के हितों और उनकी आरक्षण संबंधी मांगों के बीच संतुलन बनाना पड़ सकता है।

आरक्षण के मौजूदा लाभ में बदलाव की स्थिति में प्रभावित समुदायों की ओर से विरोध या आंदोलन की संभावना भी सामने आ सकती है। राजस्थान में पहले भी आरक्षण से जुड़े आंदोलनों के कारण बड़े सामाजिक और राजनीतिक विवाद देखने को मिले हैं।

इसके अलावा यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि SC/ST वर्ग में शामिल विभिन्न समुदायों की संख्या बड़ी है और आरक्षण का सवाल सीधे तौर पर सामाजिक प्रतिनिधित्व से जुड़ा है।

आगे क्या हो सकता है?

राज्य सरकार पहले संबंधित समुदायों की स्थिति और प्रतिनिधित्व से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन कर सकती है। इसके बाद विशेषज्ञों और संबंधित आयोगों की राय लेकर आगे की प्रक्रिया तय की जा सकती है।

फिलहाल हाईकोर्ट ने सरकार और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। इसलिए भील समुदाय के लिए 9% विशेष आरक्षण लागू हो गया है, ऐसा अभी नहीं कहा जा सकता। इस मामले में आगे की दिशा सरकार के जवाब और हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई से स्पष्ट होगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!