सिरसा कांग्रेस की गुटबाजी पर हाईकमान सख्त, आज पहुंचेगी ऑब्जर्वर कमेटी
विधायकों, सांसद समर्थक नेताओं, जिलाध्यक्ष और कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेकर तैयार होगी रिपोर्ट; इसी के आधार पर जिलाध्यक्ष बदलने पर होगा फैसला

सिरसा कांग्रेस में लंबे समय से चल रही गुटबाजी और नेताओं के बीच बढ़ती दूरी को लेकर पार्टी हाईकमान ने अब संगठन की स्थिति का रिव्यू शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में कांग्रेस की ऑब्जर्वर कमेटी आज सिरसा पहुंचेगी और जिले के विधायकों, वरिष्ठ नेताओं, पार्टी समर्थकों, कार्यकर्ताओं तथा जिलाध्यक्ष संतोष बेनीवाल से अलग-अलग फीडबैक लेगी। कमेटी हलका स्तर पर भी दौरा करेगी और कार्यकर्ताओं से संगठन की जमीनी स्थिति, आपसी मतभेद तथा पार्टी कार्यक्रमों में नेताओं और कार्यकर्ताओं की भागीदारी को लेकर जानकारी जुटाएगी। पार्टी हाईकमान ने सभी जिलों में सीडब्ल्यूसी सदस्यों और प्रदेश स्तर के नेताओं की टीमें भेजी हैं, जो जिलाध्यक्षों के कामकाज और संगठन की स्थिति की समीक्षा कर रिपोर्ट तैयार करेंगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर जिलाध्यक्षों को बदलने या मौजूदा नेतृत्व को बरकरार रखने पर फैसला लिया जाएगा। सिरसा समेत कई जिलाध्यक्षों का कार्यकाल एक साल से अधिक पूरा हो चुका है, ऐसे में संगठनात्मक समीक्षा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी ने इस पूरी प्रक्रिया को ‘संगठन सृजन अभियान’ का हिस्सा बताया है। सिरसा में सीडब्ल्यूसी सदस्य यशोमति ठाकुर, गुहला-चीका विधायक एवं प्रदेश पर्यवेक्षक देवेंद्र हंस, गायत्री देवी और मनोज राठी की टीम दो सितंबर को कांग्रेस भवन में संगठनात्मक गतिविधियों पर बैठक करेगी और इसके बाद मीडिया से भी बातचीत करेगी। सिरसा कांग्रेस में विवाद की सबसे बड़ी वजह नेताओं के बीच समन्वय की कमी बताई जा रही है। पार्टी के कार्यक्रमों और प्रदर्शनों में सभी नेता एक मंच पर नजर नहीं आते और कई बार सांसद, विधायक तथा जिलाध्यक्ष अलग-अलग कार्यक्रम करते दिखाई दिए हैं। इससे कार्यकर्ताओं के सामने भी यह सवाल खड़ा होता है कि उन्हें किस कार्यक्रम में शामिल होना है। मौजूदा समय में जिलाध्यक्ष संतोष बेनीवाल और सांसद कुमारी सैलजा के बीच दूरी की चर्चा है, जबकि जिले के विधायक और कई वरिष्ठ नेता सांसद के साथ नजर आ रहे हैं। बताया जाता है कि विवाद उस समय ज्यादा बढ़ा जब सिरसा में संकल्प यात्रा के दौरान जिलाध्यक्ष संतोष बेनीवाल पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह के साथ दिखाई दीं। इसके बाद उनके और सांसद कुमारी सैलजा के बीच दूरी बढ़ने की चर्चा शुरू हुई। बाद में रानियां दौरे के दौरान जिलाध्यक्ष के एक बयान ने भी पार्टी के अंदर चल रही खींचतान को और चर्चा में ला दिया। संतोष बेनीवाल ने कहा था कि उन्हें जिलाध्यक्ष बनाने में सांसद सैलजा की कोई भूमिका नहीं थी और पार्टी ने उन्हें यह जिम्मेदारी दी है। इसके बाद पार्टी के विभिन्न गुटों से जुड़े नेताओं के बीच दूरी और स्पष्ट नजर आने लगी। अब मामला हाईकमान तक पहुंचने के बाद ऑब्जर्वर कमेटी को स्थिति की वास्तविकता जानने की जिम्मेदारी दी गई है। कमेटी नेताओं के साथ-साथ जमीनी कार्यकर्ताओं से भी फीडबैक लेगी, ताकि केवल नेताओं के आरोप-प्रत्यारोप के आधार पर नहीं बल्कि संगठन की वास्तविक स्थिति के आधार पर रिपोर्ट तैयार की जा सके। ऐसे में आज होने वाला फीडबैक सेशन सिरसा कांग्रेस के लिए काफी अहम माना जा रहा है और इसकी रिपोर्ट के बाद जिलाध्यक्ष संतोष बेनीवाल के भविष्य को लेकर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

