2 सितंबर को कुरुक्षेत्र में होगी राज्य स्तरीय बीन प्रतियोगिता, विजेता दल को मिलेगा 75 हजार रुपये का पुरस्कार
हरियाणा की लोक कला और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के लिए प्रदेशभर के चयनित बीन दल करेंगे प्रतिभा का प्रदर्शन
सिरसा, 26 अगस्त। हरियाणा की समृद्ध लोक कला, पारंपरिक संगीत और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने तथा नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग, हरियाणा द्वारा आगामी 2 सितंबर को कुरुक्षेत्र में राज्य स्तरीय बीन प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। यह प्रतियोगिता प्रातः 10 बजे मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर, हरियाणा कला परिषद, कुरुक्षेत्र में आयोजित होगी, जिसमें प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से चयनित बीन दल अपनी पारंपरिक लोक कला एवं सांस्कृतिक प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। डीआईपीआरओ राम नाथ ने बताया कि हरियाणा की लोक संस्कृति में बीन वादन की अपनी विशिष्ट पहचान रही है और इस प्रकार के आयोजन पारंपरिक लोक कलाओं को संरक्षण देने के साथ-साथ लोक कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध करवाते हैं। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले दल को 75 हजार रुपये, द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले दल को 60 हजार रुपये तथा तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले दल को 50 हजार रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। इसके अलावा पांच सांत्वना पुरस्कार भी दिए जाएंगे और प्रत्येक सांत्वना पुरस्कार विजेता दल को 10 हजार रुपये की राशि प्रदान की जाएगी। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले कलाकारों के लिए विभाग की ओर से कुछ आवश्यक नियम एवं शर्तें भी निर्धारित की गई हैं। प्रत्येक दल में 8 से 10 कलाकार होना अनिवार्य है, जबकि दल में कम से कम 3 से 4 बीन वादक शामिल होने चाहिए। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी कलाकारों का हरियाणा का मूल निवासी होना आवश्यक है तथा उन्हें पहचान के लिए अपना आधार कार्ड साथ लाना होगा। कलाकारों को प्रस्तुति के दौरान हरियाणवी लोक परिधान पहनना भी अनिवार्य रहेगा, ताकि प्रदेश की पारंपरिक संस्कृति और लोक पहचान को मंच पर प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया जा सके। डीआईपीआरओ ने बताया कि प्रतियोगिता में शामिल होने वाले कलाकारों को किसी प्रकार का यात्रा भत्ता अथवा दैनिक भत्ता प्रदान नहीं किया जाएगा। प्रतियोगिता के दौरान निर्णायक मंडल द्वारा लिया गया निर्णय अंतिम एवं मान्य होगा। उन्होंने प्रदेश के लोक कलाकारों से इस अवसर का लाभ उठाने और हरियाणा की पारंपरिक लोक कला को बड़े मंच पर प्रस्तुत करने का आह्वान किया।



