*क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का झांसा देकर साइबर ठगी, अनजान कॉल और लिंक से रहें सावधान* *बैंक अधिकारी बनकर ठग मांग रहे क्रेडिट कार्ड की गोपनीय जानकारी, OTP, CVV और PIN किसी से साझा न करें* डबवाली, 30 अगस्त। साइबर अपराधी आमजन को ठगी का शिकार बनाने के लिए लगातार नए-नए तरीके अपना रहे हैं। इसी कड़ी में साइबर ठगों द्वारा क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने, कार्ड अपग्रेड करने अथवा अतिरिक्त क्रेडिट सुविधा उपलब्ध करवाने के नाम पर लोगों को अपने जाल में फंसाने का प्रयास किया जा रहा है। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक डबवाली जसलीन कौर, आईपीएस के निर्देशन में डबवाली पुलिस ने आमजन को विशेष रूप से सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस प्रवक्ता एवं साइबर अपराध शाखा प्रभारी उप निरीक्षक आनन्द कुमार ने बताया कि साइबर ठग फोन कॉल, SMS, WhatsApp अथवा अन्य माध्यमों से संपर्क कर स्वयं को बैंक या क्रेडिट कार्ड कंपनी का कर्मचारी बताते हैं। बातचीत के दौरान ठग क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने या कार्ड अपग्रेड करने का झांसा देकर व्यक्ति से क्रेडिट कार्ड नंबर, CVV, एक्सपायरी डेट, OTP, PIN अथवा अन्य बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी हासिल करने का प्रयास करते हैं। कई मामलों में ठग प्रक्रिया पूरी करने या वेरिफिकेशन के नाम पर मोबाइल पर भेजे गए लिंक पर क्लिक करवाने, कोई एप डाउनलोड करवाने अथवा स्क्रीन शेयर करने के लिए भी दबाव बना सकते हैं। ऐसी स्थिति में किसी भी अनजान व्यक्ति पर भरोसा न करें और अपनी बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी साझा न करें। उन्होंने आमजन को आगाह किया है कि क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने के नाम पर आने वाली किसी भी अनजान कॉल, मैसेज या लिंक को लेकर विशेष सावधानी बरतें। यदि कोई व्यक्ति बैंक अधिकारी बनकर क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का प्रस्ताव देता है तो उसकी बातों में आकर कोई जानकारी साझा न करें। क्रेडिट कार्ड से संबंधित किसी भी सुविधा की जानकारी लेने के लिए संबंधित बैंक की आधिकारिक वेबसाइट, अधिकृत मोबाइल ऐप या बैंक शाखा के माध्यम से ही संपर्क करें। किसी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक या उपलब्ध करवाए गए मोबाइल नंबर के माध्यम से बैंकिंग प्रक्रिया पूरी न करें। पुलिस प्रवक्ता ने विशेष रूप से कहा कि OTP, PIN, CVV, कार्ड नंबर और इंटरनेट बैंकिंग संबंधी पासवर्ड जैसी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। साइबर ठग कई बार लिमिट बढ़ाने के लिए प्रोसेसिंग फीस, KYC अपडेट या वेरिफिकेशन के नाम पर भी लोगों को भ्रमित करते हैं। ऐसे किसी भी अनुरोध पर तुरंत विश्वास करने के बजाय संबंधित बैंक से आधिकारिक माध्यम से इसकी पुष्टि करें। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में कोई संदिग्ध एप्लीकेशन डाउनलोड न करें और न ही किसी व्यक्ति को मोबाइल की स्क्रीन देखने या नियंत्रित करने की अनुमति दें। उन्होंने कहा कि साइबर ठगी से बचने के लिए सतर्कता ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर धोखाधड़ी हो जाती है तो घबराने के बजाय तुरंत अपने बैंक अथवा संबंधित क्रेडिट कार्ड जारी करने वाली संस्था को सूचित कर कार्ड या खाते को सुरक्षित करवाएं तथा साइबर ठगी की सूचना तत्काल 1930 पर दें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime.gov.in/ पर शिकायत दर्ज कराएं । ठगी से संबंधित SMS, WhatsApp चैट, फोन नंबर, लिंक, स्क्रीनशॉट अथवा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को भी सुरक्षित रखें, ताकि कार्रवाई में मदद मिल सके। डबवाली पुलिस आमजन से अपील करती है कि साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए जा रहे नए तरीकों के प्रति स्वयं जागरूक रहें और अपने परिवार के सदस्यों, विशेषकर बुजुर्गों को भी इस प्रकार की साइबर ठगी के बारे में जानकारी दें। क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का लालच कहीं आपकी मेहनत की कमाई पर भारी न पड़ जाए, इसलिए अनजान कॉल और लिंक से सावधान रहें तथा किसी भी परिस्थिति में अपनी गोपनीय बैंकिंग जानकारी साझा न करें। डबवाली पुलिस का साइबर सुरक्षा संदेश “क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का झांसा हो या कोई अन्य बैंकिंग ऑफर, पहले संबंधित बैंक से सत्यापित करें और फिर विश्वास करें। OTP, PIN और CVV किसी से साझा न करें। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें।
बैंक अधिकारी बनकर मांग रहे कार्ड नंबर, OTP, CVV और PIN; अनजान लिंक पर क्लिक या स्क्रीन शेयर करने से बचने की अपील
डबवाली पुलिस ने साइबर ठगी के बढ़ते मामलों को देखते हुए आमजन को क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने और कार्ड अपग्रेड करने के नाम पर होने वाली ठगी से सावधान रहने की अपील की है। पुलिस के अनुसार साइबर अपराधी फोन कॉल, SMS, WhatsApp और अन्य माध्यमों से लोगों से संपर्क कर खुद को बैंक या क्रेडिट कार्ड कंपनी का कर्मचारी बताते हैं और लिमिट बढ़ाने, कार्ड अपग्रेड करने या अतिरिक्त क्रेडिट सुविधा देने का लालच देकर उनकी गोपनीय बैंकिंग जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं। ठग बातचीत के दौरान क्रेडिट कार्ड नंबर, CVV, एक्सपायरी डेट, OTP, PIN और इंटरनेट बैंकिंग संबंधी जानकारी मांग सकते हैं। इतना ही नहीं, कई मामलों में KYC अपडेट, वेरिफिकेशन या प्रोसेसिंग के नाम पर अनजान लिंक पर क्लिक करवाने, संदिग्ध मोबाइल एप डाउनलोड करवाने अथवा स्क्रीन शेयर करने के लिए भी दबाव बनाया जाता है। डबवाली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अनजान कॉल या मैसेज पर भरोसा कर बैंकिंग जानकारी साझा न करें और क्रेडिट कार्ड से संबंधित किसी सुविधा की पुष्टि के लिए केवल संबंधित बैंक की आधिकारिक वेबसाइट, अधिकृत मोबाइल ऐप या बैंक शाखा का इस्तेमाल करें। पुलिस ने विशेष रूप से चेताया है कि OTP, PIN, CVV, कार्ड नंबर और इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड कभी किसी के साथ साझा न करें, भले ही सामने वाला खुद को बैंक अधिकारी क्यों न बताए। यदि कोई व्यक्ति लिमिट बढ़ाने के नाम पर KYC, प्रोसेसिंग फीस या वेरिफिकेशन के लिए जानकारी मांगता है तो पहले बैंक से आधिकारिक माध्यम से इसकी पुष्टि करें। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में संदिग्ध ऐप डाउनलोड करने या स्क्रीन शेयरिंग/रिमोट एक्सेस की अनुमति देने से भी बचें। पुलिस प्रवक्ता एवं साइबर अपराध शाखा प्रभारी उप निरीक्षक आनन्द कुमार ने कहा कि साइबर ठगी से बचने का सबसे बड़ा हथियार सतर्कता है। यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर धोखाधड़ी हो जाती है तो बिना देरी किए संबंधित बैंक या कार्ड जारी करने वाली संस्था को सूचित कर कार्ड/खाते को सुरक्षित करवाएं और तत्काल 1930 पर साइबर ठगी की सूचना दें। साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराते समय SMS, WhatsApp चैट, फोन नंबर, संदिग्ध लिंक, स्क्रीनशॉट और अन्य डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखें। पुलिस ने लोगों से यह भी अपील की है कि वे अपने परिवार के सदस्यों और विशेष रूप से बुजुर्गों को ऐसे साइबर फ्रॉड के तरीकों के बारे में जागरूक करें। क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का लालच आपकी मेहनत की कमाई पर भारी पड़ सकता है, इसलिए पहले सत्यापन करें और फिर विश्वास करें।



