अलवर में बीजेपी के 2 मंडल अध्यक्षों का इस्तीफा, जयपुर में कांग्रेस के खिलाफ प्रदर्शन; निकाय चुनाव में टिकटों पर घमासान
नामांकन के आखिरी दिन टिकट बंटवारे को लेकर बढ़ी नाराजगी, कई दावेदार निर्दलीय उतर सकते हैं; जयपुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शहर अध्यक्ष का पुतला फूंका।

राजस्थान के 309 निकायों में नामांकन का आखिरी दिन होने के साथ ही टिकट वितरण को लेकर बीजेपी और कांग्रेस दोनों में अंदरूनी खींचतान तेज हो गई है। बीजेपी ने कई जगह अब तक प्रत्याशियों की औपचारिक सूची जारी नहीं की है और दावेदारों से सीधे नामांकन करवाने के बाद पार्टी का अधिकृत सिंबल देने की रणनीति अपनाई जा रही है। अलवर में टिकटों को लेकर नाराजगी खुलकर सामने आई, जहां दावेदारों की जानकारी सामने आने के बाद बीजेपी के विवेकानंद मंडल अध्यक्ष जितेंद्र राठौड़ और केशव मंडल अध्यक्ष महेश निहलानी ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। जितेंद्र राठौड़ ने आरोप लगाया कि उनकी बात नहीं सुनी गई और सीट पर ओबीसी प्रत्याशी को टिकट देने से पहले उनसे सलाह तक नहीं की गई, जबकि महेश निहलानी ने टिकट पाने वाले कुछ लोगों के प्रति जनता में नाराजगी होने का दावा करते हुए पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप लगाया। दूसरी ओर जयपुर के हवामहल विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशियों की घोषणा से पहले ही पार्टी के भीतर विरोध शुरू हो गया और कार्यकर्ताओं ने शहर अध्यक्ष सुनील शर्मा का पुतला फूंककर अल्पसंख्यक समुदाय की कथित अनदेखी का आरोप लगाया। जयपुर में 150 वार्डों के लिए 15 स्थानों पर नामांकन केंद्र बनाए गए हैं और नामांकन के अंतिम दिन प्रत्याशियों तथा समर्थकों की भीड़ बढ़ने की संभावना है। बीजेपी ने कुछ प्रमुख चेहरों को चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी की है, वहीं टिकट से वंचित दावेदारों के निर्दलीय चुनाव लड़ने की संभावना भी बढ़ गई है। इससे कई वार्डों में मुकाबला त्रिकोणीय या बहुकोणीय हो सकता है। अजमेर में भी 80 वार्डों के लिए नामांकन की प्रक्रिया चल रही है, जबकि उदयपुर और कोटा में प्रत्याशी समर्थकों के साथ नामांकन दाखिल करने पहुंच रहे हैं। सिरोही में प्रस्तावित खनन परियोजना के विरोध में 12 गांवों के ग्रामीणों द्वारा चुनाव बहिष्कार का ऐलान किए जाने से स्थानीय चुनावी माहौल और भी संवेदनशील हो गया है। नामांकन खत्म होने के बाद टिकट वितरण से नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं का अगला कदम राजस्थान के निकाय चुनावों के समीकरणों पर बड़ा असर डाल सकता है।



