रिम्स में स्वाइन फ्लू वार्ड की बदहाली, सीपेज-काई और फफूंद वाले कॉटेज में रिजर्व किए 10 बेड
संक्रमण के बीच मरीजों के लिए बढ़ा खतरा, प्रबंधन बोला- पहले आइसोलेशन वार्ड में भर्ती होंगे मरीज

झारखंड में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों को अलर्ट करते हुए मरीजों के लिए बेड, ऑक्सीजन, वेंटिलेटर, एन95 मास्क और जरूरी दवाओं की व्यवस्था रखने के निर्देश दिए हैं, लेकिन रांची स्थित रिम्स में तैयारियों के बीच व्यवस्था की बदहाल तस्वीर सामने आई है। रिम्स प्रबंधन ने आइसोलेशन वार्ड के अलावा कॉटेज में भी स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए 10 बेड रिजर्व किए हैं, लेकिन जिन कमरों में ये बेड रखे गए हैं, वहां दीवारों और छत पर सीपेज, काई और फफूंद की समस्या दिखाई दे रही है। कई जगहों पर छत से पानी टपकने और नमी के कारण प्लास्टर झड़ने की स्थिति है, जबकि बाथरूम की हालत भी खराब बताई गई है। ऐसे माहौल में सांस संबंधी बीमारी से जूझ रहे मरीजों को रखने की तैयारी पर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार लगातार नमी वाले कमरों में फफूंद और अन्य सूक्ष्मजीव पनप सकते हैं, जिससे एलर्जी, सांस संबंधी परेशानी और दूसरे संक्रमणों का खतरा बढ़ सकता है। खासकर पहले से श्वसन संबंधी समस्या से जूझ रहे स्वाइन फ्लू मरीजों, बुजुर्गों, बच्चों और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के लिए अस्पताल के वार्ड का साफ-सुथरा और संक्रमण नियंत्रण के मानकों के अनुरूप होना बेहद जरूरी है। रिम्स की माइक्रोबायोलॉजी लैब में भी स्वाइन फ्लू के नए मामले सामने आए हैं। लैब हेड डॉ. मनोज कुमार के अनुसार पहले आठ संक्रमित मरीजों की पहचान हो चुकी थी और मंगलवार को जांच किए गए चार सैंपलों में से तीन की रिपोर्ट पॉजिटिव आई, जिसके बाद रिम्स में जांचे गए सैंपलों में संक्रमितों की संख्या 11 हो गई। राज्य में एच1एन1 और एच3एन2 को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से तैयारियां बढ़ाई गई हैं और सरकारी तथा निजी लैब से अब तक 25 से अधिक संक्रमितों की पहचान होने की बात सामने आई है। ऐसे समय में अस्पताल में संक्रमण नियंत्रण और मरीजों के लिए सुरक्षित वातावरण महत्वपूर्ण हो जाता है। रिम्स के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. शिशिर कुमार ने कहा कि स्वाइन फ्लू के संदिग्ध और संक्रमित मरीजों के लिए आइसोलेशन वार्ड तथा कॉटेज में जगह चिन्हित की गई है। उनके मुताबिक पहले मरीजों को आइसोलेशन वार्ड में रखा जाएगा और यदि मरीजों की संख्या बढ़ती है, तभी कॉटेज में भर्ती की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि कॉटेज की स्थिति ठीक कराई जाएगी। फिलहाल रिम्स में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों के बीच रिजर्व किए गए कॉटेज की स्थिति अस्पताल की तैयारियों और संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।



