मूवी रिव्यू- ‘दायरा’: पृथ्वीराज का पुलिसिया तेवर और करीना की जांच ने बांधे रखा, लेकिन दूसरे हाफ में कमजोर पड़ती है कहानी
क्राइम, एनकाउंटर और न्याय के सवालों के बीच उलझी कहानी; शानदार शुरुआत के बावजूद क्लाइमैक्स छोड़ता है कुछ अधूरापन

रेटिंग: 2.5/5
अवधि: 2 घंटे 23 मिनट
शैली: क्राइम थ्रिलर / इन्वेस्टिगेटिव ड्रामा
निर्देशक: मेघना गुलजार
मुख्य कलाकार: करीना कपूर खान, पृथ्वीराज सुकुमारन, क्षिती जोग, कनवलजीत सिंह, जितेंद्र जोशी
रिलीज डेट: 18 सितंबर 2026
कहानी में शुरुआत से ही उठता है बड़ा सवाल
‘दायरा’ की शुरुआत एक गंभीर अपराध से होती है और कुछ ही देर में कहानी पुलिस जांच, एनकाउंटर और न्याय व्यवस्था के सवालों तक पहुंच जाती है। एक युवती की हत्या के बाद पुलिस तेजी से आरोपियों तक पहुंचती है। लेकिन अदालत में सुनवाई शुरू होने से पहले ही चारों आरोपी पुलिस एनकाउंटर में मारे जाते हैं।
पुलिस इसे मुठभेड़ बताती है, जबकि कहानी आगे बढ़ने के साथ यह सवाल सामने आता है कि क्या यह वास्तव में मुठभेड़ थी या कानून से बाहर जाकर लिया गया फैसला?
फिल्म यहीं से अपनी असली दिशा पकड़ती है। यह सिर्फ अपराध की जांच नहीं रह जाती, बल्कि ‘जल्दी न्याय’ और ‘कानूनी प्रक्रिया’ के बीच टकराव की कहानी बन जाती है।
क्या है फिल्म की कहानी?
कहानी रागिनी से शुरू होती है, जो एक रात हाईवे के पास परेशानी में फंस जाती है। इसके बाद वह लापता हो जाती है और अगले दिन उसका जला हुआ शव बरामद होता है।
रागिनी की मां पार्वती और भाई कबीर न्याय की उम्मीद में पुलिस के पास पहुंचते हैं। मामला मीडिया में आने के बाद जांच की जिम्मेदारी डीसीपी रमन कुमार को दी जाती है।
रमन अपनी टीम के साथ चार संदिग्धों को गिरफ्तार करता है, लेकिन मामला अदालत तक पहुंचने से पहले ही चारों आरोपी पुलिस मुठभेड़ में मारे जाते हैं।
इसके बाद पूरे मामले की जांच के लिए डीसीपी अजूनी कोहली के नेतृत्व में विशेष जांच टीम गठित की जाती है। अजूनी को न सिर्फ एनकाउंटर की सच्चाई पता करनी है, बल्कि रागिनी की हत्या से जुड़ी पूरी कड़ी को भी समझना है।
पृथ्वीराज सुकुमारन ने संभाला मोर्चा
डीसीपी रमन कुमार के किरदार में पृथ्वीराज सुकुमारन प्रभावी नजर आते हैं। उनके किरदार में पुलिस अधिकारी का दबदबा है, लेकिन वह सिर्फ एक कठोर अफसर के रूप में सामने नहीं आते।
पृथ्वीराज ने संवादों और बॉडी लैंग्वेज के जरिए किरदार को मजबूती दी है। उनकी अदाकारी की खास बात यह है कि रमन को पूरी तरह नायक या खलनायक के खांचे में रखना आसान नहीं है।
करीना कपूर का शांत अंदाज
डीसीपी अजूनी कोहली के किरदार में करीना कपूर खान का अभिनय संयमित है। उनका किरदार हर स्थिति में शोर मचाने के बजाय तथ्यों और छोटी-छोटी विसंगतियों पर ध्यान देता है।
करीना ने इस भूमिका में ज्यादा आक्रामक अंदाज अपनाने के बजाय एक जांच अधिकारी की गंभीरता को बनाए रखा है। हालांकि, किरदार में मौजूद संभावनाओं को स्क्रीनप्ले पूरी तरह इस्तेमाल नहीं कर पाता।
क्षिती जोग की एक्टिंग खास
रागिनी की मां पार्वती के किरदार में क्षिती जोग का काम उल्लेखनीय है। बेटी को खोने के बाद एक मां के दर्द को उन्होंने भावनात्मक दृश्यों में सहज तरीके से पेश किया है।
उनके किरदार से जुड़े दृश्य फिल्म को मानवीय पक्ष देते हैं और कहानी के भावनात्मक असर को बढ़ाते हैं।
मेघना गुलजार का निर्देशन
मेघना गुलजार क्राइम और जांच की कहानियों को गंभीर माहौल में पेश करने के लिए जानी जाती हैं। ‘दायरा’ में भी उनका फोकस अपराध के साथ उससे जुड़े सिस्टम और न्याय के सवालों पर है।
फिल्म का पहला हिस्सा मजबूत है। घटनाओं को धीरे-धीरे सामने लाने से रहस्य बना रहता है और दर्शक लगातार आगे की कहानी जानना चाहता है।
हालांकि इंटरवल के बाद कहानी की गति कुछ जगह कम हो जाती है। कुछ दृश्यों में वही बात दोबारा समझाने की कोशिश महसूस होती है।
स्क्रीनप्ले में दूसरे हाफ की कमजोरी
फिल्म का स्क्रीनप्ले शुरुआत में काफी चुस्त है। जांच आगे बढ़ती है और अलग-अलग घटनाएं एक-दूसरे से जुड़ती दिखाई देती हैं।
लेकिन दूसरे हाफ में कहानी की रफ्तार कम हो जाती है। कुछ हिस्से जरूरत से ज्यादा लंबे लगते हैं। इससे शुरुआती हिस्से में बना तनाव धीरे-धीरे कम होने लगता है।
क्लाइमैक्स भी फिल्म की एक कमजोर कड़ी है। इतने गंभीर सवाल खड़े करने के बाद जिस तरह कहानी अपने निष्कर्ष तक पहुंचती है, वह दर्शकों को पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर पाता।
तकनीकी पक्ष
फिल्म की सिनेमैटोग्राफी इसके गंभीर माहौल को अच्छी तरह सपोर्ट करती है। क्लोज-अप और सीमित फ्रेमिंग के इस्तेमाल से किरदारों के तनाव को उभारा गया है।
एडिटिंग पहले हिस्से में प्रभावी है, लेकिन दूसरे भाग में कुछ दृश्यों को और संक्षिप्त किया जा सकता था।
केतन सोढ़ा का बैकग्राउंड स्कोर फिल्म के सस्पेंस और तनाव वाले दृश्यों को सपोर्ट करता है। हालांकि संगीत फिल्म का प्रमुख आकर्षण नहीं बनता।
फिल्म की प्रमुख कमियां
‘दायरा’ की सबसे बड़ी समस्या इसका दूसरा हिस्सा है। शुरुआत में जो रहस्य और तनाव पैदा होता है, वह आगे जाकर पूरी तरह कायम नहीं रह पाता।
फिल्म जिन महत्वपूर्ण सवालों को उठाती है, उन पर कुछ जगह ज्यादा विस्तार से समझाने की कोशिश कहानी की गति को प्रभावित करती है।
क्लाइमैक्स भी उस स्तर का प्रभाव नहीं छोड़ता जिसकी उम्मीद फिल्म की मजबूत शुरुआत के बाद होती है।
फाइनल वर्डिक्ट
‘दायरा’ एक गंभीर विषय पर बनी क्राइम थ्रिलर है, जिसमें अपराध के साथ न्याय व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं।
पृथ्वीराज सुकुमारन और करीना कपूर खान का अभिनय फिल्म को मजबूती देता है, जबकि क्षिती जोग के भावनात्मक दृश्य कहानी में मानवीय पक्ष जोड़ते हैं। मेघना गुलजार का निर्देशन शुरुआती हिस्से में प्रभावी नजर आता है।
हालांकि कमजोर होता दूसरा हाफ और अपेक्षाकृत फीका क्लाइमैक्स फिल्म के प्रभाव को कम कर देता है।
रेटिंग: ⭐⭐½ (2.5/5)
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