राजस्थान में 16 साल में सबसे कम बारिश: जालोर-पाली में सामान्य से 51% कम, सितंबर में भी बिजली की डिमांड बढ़ी
राजस्थान में मानसून की बारिश सामान्य से 18% कम, जालोर-पाली में 51% तक कमी; कमजोर बारिश से खरीफ फसलों और बिजली की मांग पर असर

जयपुर। राजस्थान में इस साल मानसून कमजोर रहा है। राज्य में अब तक औसत से करीब 18% कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 18 सितंबर तक राजस्थान में 345.8 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि मानसून सीजन का औसत 435.6 मिलीमीटर है।
मौजूदा स्थिति को पिछले 16 वर्षों में कमजोर मानसून के प्रमुख उदाहरणों में गिना जा रहा है। इससे पहले 2009 में सामान्य से 42.8% कम बारिश दर्ज की गई थी। इसके मुकाबले 2024 में सामान्य से 55% और 2025 में 64% अधिक बारिश हुई थी।
जालोर और पाली में सामान्य से 51% कम बारिश
राजस्थान के कई जिलों में इस बार बारिश की कमी दर्ज की गई है। जालोर और पाली में सामान्य से 51% कम, बांसवाड़ा में 47% और सिरोही में 44% कम बारिश हुई है। जैसलमेर में भी सामान्य से 48% कम बारिश दर्ज की गई।
वहीं कुछ जिलों में स्थिति इसके उलट रही। अलवर में सामान्य बारिश हुई, जबकि भरतपुर में सामान्य से 30% अधिक बारिश दर्ज की गई। दौसा में 12%, धौलपुर में 30%, झुंझुनूं में 6% और नागौर में 5% अधिक बारिश हुई।
अगस्त में सबसे ज्यादा कमी
मानसून सीजन के दौरान बारिश में लगातार कमी देखने को मिली। जून में प्रदेश में सामान्य से 17% ज्यादा बारिश हुई थी, लेकिन इसके बाद मानसून कमजोर पड़ता गया।
जुलाई में सामान्य से 19% और अगस्त में 33% कम बारिश दर्ज की गई। सितंबर में 18 सितंबर तक बारिश सामान्य से करीब 30% कम रही।
गर्मी बढ़ने से बिजली की मांग पर असर
कम बारिश के कारण सितंबर में भी कई इलाकों में तापमान सामान्य से ऊपर रहा। बाड़मेर में 13 सितंबर को तापमान 40.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।
बढ़े तापमान के कारण बिजली की मांग पर भी असर पड़ा है। बिजली विभाग के अनुसार पिछले साल की तुलना में इस साल बिजली की मांग में करीब 1,000 लाख यूनिट की बढ़ोतरी हुई है। इसमें कृषि के साथ घरेलू बिजली की खपत भी शामिल है।
खरीफ फसलों पर असर की आशंका
कमजोर मानसून का असर खरीफ फसलों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। ग्वार, मूंग और मोठ जैसी फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है। इसका असर खास तौर पर पश्चिमी राजस्थान के बारिश पर निर्भर क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है।
इस साल खरीफ फसलों की बुआई का लक्ष्य 165.39 लाख हेक्टेयर रखा गया था, लेकिन करीब 154 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही बुआई हो सकी।
कृषि वैज्ञानिक योगेश शर्मा के अनुसार, बारिश पर निर्भर रहने वाले कई क्षेत्रों में फसलों की स्थिति चिंताजनक है। हालांकि, सभी जिलों में फसलों को हुए नुकसान के आधिकारिक आंकड़े अभी उपलब्ध नहीं हैं।
मानसून की विदाई से पहले तेज बारिश की उम्मीद कम
मौसम विभाग के अनुसार राजस्थान से मानसून की विदाई 30 सितंबर तक होने की संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक, मानसून की विदाई से पहले राज्य में बड़े पैमाने पर तेज बारिश होने के आसार कम हैं।
कम बारिश का असर खेती, बिजली की खपत और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। हालांकि, फसल उत्पादन पर वास्तविक असर का आकलन आधिकारिक कृषि आंकड़े आने के बाद ही स्पष्ट होगा।



