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राजस्थान

भाषण सुन छोड़ी पुलिस की नौकरी,आजादी की जंग में कूदे:राजस्थान में खोली पहली दलित पाठशाला, पढ़ें- स्वतंत्रता सेनानी रामप्रताप शर्मा की कहानी पाली के गुंदोज से16 घंटे पहले लेखक: वीरेंद्र उदेश जिस उम्र में बच्चे खेलते हैं, 12 साल के रामप्रताप शर्मा ने माता-पिता खो दिए। पैतृक जमीन पर जागीरदारों ने कब्जा कर लिया। कमजोर तबकों पर जुल्म की घटनाओं ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया। जोधपुर आए नेताजी सुभाषचंद्र बोस का भाषण सुनकर पुलिस की नौकरी छोड़ आजादी की जंग में कूद पड़े। आंदोलनों में लाठी खाई और जेल भी गए। छुआछूत के दौर में जब स्कूलों ने दलित बच्चों के लिए दरवाजे बंद कर दिए तो उन्होंने किराए के मकान में राजस्थान की पहली दलित पाठशाला खोल दी। छोटे भाई को नौकरी छुड़वाकर पढ़ाने का जिम्मा सौंप दिया। यही पाठशाला आगे चलकर स्कूल बनी और आज उसी अंग्रेज अफसरों के बंगले में सीनियर हायर सेकेंडरी स्कूल चल रहा है। अंग्रेजों से लड़ाई के साथ छुआछूत के खिलाफ भी मोर्चा खोलने वाले स्वतंत्रता सेनानी रामप्रताप शर्मा की कहानी जानने भास्कर टीम उनके गांव पहुंची। पढ़िए ये खास रिपोर्ट…. 12 की उम्र में माता-पिता का साया उठा पाली से करीब 20 किलोमीटर दूर है गुंदोज गांव। यहां ब्रह्मपुरी इलाके में स्वतंत्रता सेनानी रामप्रताप शर्मा और उनके छोटे भाई मगराज के पुश्तैनी मकान है। हम घर में दाखिल हुए तो उनके पोते और छोटे भाई मगराज के बेटे ने उस दौर की कहानी बयां की। पाली के गुंदोज गांव में रामप्रताप शर्मा का पुश्तैनी मकान। पाली के गुंदोज गांव में रामप्रताप शर्मा का पुश्तैनी मकान। पोते महेश जोशी बताते हैं- दादा रामप्रताप शर्मा जब 12 साल के थे, तब सिर से माता-पिता साया उठ गया। सामंती प्रथा होने के चलते जागीरदारों ने पैतृक जमीन पर कब्जा कर लिया था। ऐसे में उन्हें अपने ननिहाल बगड़ी में शरण लेनी पड़ी। ननिहाल की जमीन भी पहले से सामंतों के कब्जे में थी। घर में संजोकर रखी स्वतंत्रता सेनानी की तस्वीरें दिखाते परिवार के सदस्य। घर में संजोकर रखी स्वतंत्रता सेनानी की तस्वीरें दिखाते परिवार के सदस्य। कमजोर तबके से मारपीट की घटना ने झकझोरा साल 1934 में ननिहाल बगड़ी में खुला दरबार लगा था। वहां खुलेआम नामी सेठ-साहूकारों और कमजोर तबके के लोगों को बेरहमी से पीटा गया। इस घटना ने रामप्रताप को अंदर तक झकझोर दिया। तभी उन्होंने अपनी और नाना की जमीन सामंतों से आजाद करवाने की ठानी। शर्मा भारतीय सेना में शामिल होकर ताकतवर पद पर पहुंचना चाहते थे। लेकिन उस समय भारतीय-ब्रिटिश सेना में ब्राह्मणों (पुस्तक वंदे मातरम् के अनुसार) को भर्ती नहीं किया जाता था। ऐसे में रामप्रताप शर्मा पुलिस में बतौर हेड कॉन्स्टेबल भर्ती हुए थे। जोधपुर में ‘नेताजी’ का भाषण सुन नौकरी छोड़ी साल 1938 में विलायत से लौटे नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने जोधपुर में एक आम सभा रखी थी। उस आमसभा में लॉ एंड आर्डर संभालने का जिम्मा हेड कॉन्स्टेबल रामप्रताप शर्मा के पास ही था। बोस का भाषण सुनकर शर्मा उनकी राष्ट्र भावना से बेहद प्रेरित हुए। रामप्रताप शर्मा पुलिस में भर्ती हुए थे, लेकिन आजादी की लड़ाई के लिए उन्होंने नौकरी से त्यागपत्र दे दिया था। रामप्रताप शर्मा पुलिस में भर्ती हुए थे, लेकिन आजादी की लड़ाई के लिए उन्होंने नौकरी से त्यागपत्र दे दिया था। अगले ही साल 1939 में रामप्रताप शर्मा ने पुलिस की नौकरी से इस्तीफा दे दिया। अपने पैतृक गांव गुंदोज लौटकर जागीरदार और सामंती प्रथा के खिलाफ आवाज उठाना शुरू किया। उसी साल रामप्रताप शर्मा मारवाड़ लोक परिषद के सदस्य बन गए। सत्याग्रह आंदोलन में गए जेल जमनालाल बजाज और हीरालाल शास्त्री के मार्गदर्शन में सत्याग्रह आंदोलन जोरों पर था। आंदोलनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने पर अंग्रेजी हुकूमत ने रामप्रसाद शर्मा को 1943 में गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया। उन पर लूट और अन्य कई धाराओं में केस दर्ज किए। 2 साल जेल में बिताने के बाद 1945 में हाकिम रूपसिंह राठौड़ और गोरधन सिंह भंडारी ने उनको बरी कर दिया। जोधपुर जेल से रिहा होकर शर्मा अपने गांव लौटे और फिर से किसान आंदोलन में जुट गए। अंग्रेजी हुकूमत-जागीरदार प्रथा के विरोध में वे कई बार मारपीट के भी शिकार हुए। किराए के मकान में खोली राजस्थान की पहली दलित पाठशाला पुस्तक वंदे मातरम् में छपी उनकी जीवनी के अनुसार रामप्रताप शर्मा विनोबा भावे के दलित आंदोलन के बड़े समर्थक थे। यही वजह थी कि वे छुआछूत के प्रबल विरोधी थे। उस दौर में गुंदोज की पाठशाला में दलित या अनुसूचित जाति के बच्चों को प्रवेश नहीं मिलता था। ऐसे बच्चों को पढ़ाने के लिए शर्मा ने सत्याग्रह में साथ निभाने वाले सेठ पुखराज जैन का मकान किराए पर लिया। साल 1945 में एक शिक्षा समिति गठित कर पहली दलित पाठशाला की स्थापना की। पढ़ाने का जिम्मा अपने छोटे भाई मगराज को दिया। उन बच्चों को स्कूल की दहलीज तक पहुंचाया, जिनके लिए पढ़ाई करना किसी सपने से कम नहीं था।

16 वर्षीय नाबालिग ने दोस्त के साथ मिलकर 85 वर्षीय दादा की हत्या की; पुलिस के मुताबिक मोबाइल में हत्या से जुड़ी सर्च हिस्ट्री मिली, शव बोरे में डालकर स्कूटी से नदी तक ले जाने का आरोप

पाली। राजस्थान के पाली जिले के बाली क्षेत्र में 85 वर्षीय बुजुर्ग की हत्या के मामले का पुलिस ने खुलासा करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार मृतक के 16 वर्षीय पोते ने अपने दोस्त के साथ मिलकर दादा की हत्या की और इसके बाद शव को बोरे में डालकर स्कूटी से नदी के पास ले जाकर फेंक दिया। पुलिस ने नाबालिग पोते को डिटेन किया है, जबकि उसके दोस्त और खेत की रखवाली करने वाले 50 वर्षीय व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। घटना 10 अगस्त की बताई जा रही है और 12 अगस्त को ग्रामीणों ने नदी किनारे शव देखा, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मॉर्च्युरी में रखवाया और पहचान होने के बाद परिवार के सदस्यों से पूछताछ शुरू की। पुलिस के मुताबिक पूछताछ के दौरान नाबालिग पोता घबरा गया और उसने हत्या में अपनी भूमिका स्वीकार की। पुलिस ने उसके मोबाइल फोन की जांच की तो उसमें हत्या के तरीकों से संबंधित इंटरनेट सर्च किए जाने की बात सामने आई। पुलिस के अनुसार नाबालिग ने बताया कि घटना की रात परिवार के सदस्य घर के अंदर सो रहे थे, जबकि उसके दादा बाहर सोए हुए थे। आरोप है कि उसने अपने दोस्त को बुलाया और दोनों ने बुजुर्ग पर हमला किया। इसके बाद शव को बोरे में डालकर स्कूटी से करीब आधा किलोमीटर दूर नदी के पास ले जाया गया और वहां फेंक दिया गया। पुलिस के अनुसार घटना के बाद कपड़े और बोरी भी जलाई गई। पुलिस जांच में हत्या के पीछे पारिवारिक विवाद और लंबे समय से चली आ रही नाराजगी की बात सामने आई है। नाबालिग के अनुसार करीब तीन वर्ष पहले उसके पिता की मौत हुई थी और उसे लगा कि दादा ने पिता की मौत पर दुख नहीं जताया। इसके बाद उसके मन में दादा के प्रति रंजिश बढ़ती गई। इसके अलावा उसकी बहन की शादी को लेकर भी परिवार में विवाद हुआ था। मृतक के चार बेटों में से दो मुंबई में अपने परिवार के साथ रहते हैं, जबकि दो बेटों की पहले ही मौत हो चुकी थी। बुजुर्ग अपनी दो बहुओं और पोतों के साथ गांव में रहते थे। 12 अगस्त को नदी किनारे शव मिलने के बाद मुंबई में रहने वाले बेटों को सोशल मीडिया के जरिए पिता की मौत की जानकारी मिली और 13 अगस्त को उन्होंने थाने में हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और हत्या से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच जारी है। नाबालिग होने के कारण आरोपी के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई किशोर न्याय कानून के प्रावधानों के तहत की जाएगी।

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