सोनिया गांधी की किताब पर गहलोत का केंद्र पर हमला: बोले- बोलने की आजादी को बैन करना चाहती सरकार
दावा- पेंगुइन ने कुछ अंश हटाने को कहा, सोनिया गांधी ने किया इनकार; गहलोत बोले- पूरी दुनिया में छपेगी किताब, भारत में नहीं

जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोनिया गांधी की किताब के प्रकाशन को लेकर उठे विवाद पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। गहलोत ने आरोप लगाया कि सरकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने का प्रयास कर रही है।
गहलोत ने कहा कि सोनिया गांधी की किताब पहले 10 नवंबर को प्रकाशित होने वाली थी, लेकिन उनके अनुसार प्रकाशक पेंगुइन अब भारत में इस किताब को प्रकाशित करने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि इसके पीछे किसी तरह का दबाव हो सकता है, हालांकि इसका वास्तविक कारण समय के साथ सामने आएगा।
गहलोत का दावा- कुछ अंश हटाने को कहा गया
अशोक गहलोत के मुताबिक पेंगुइन की ओर से सोनिया गांधी से किताब के कुछ अंश हटाने को कहा गया था, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया।
गहलोत ने कहा कि किताब में चीन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस को लेकर कुछ टिप्पणियां हो सकती हैं, जिसके कारण कुछ लोगों को आपत्ति हो सकती है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी किताब के अंश हटाने के लिए दबाव बनाया जाता है तो लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का क्या अर्थ रह जाता है।
हालांकि, गहलोत द्वारा लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं हुई है।
बोले- पूरी दुनिया में किताब छपेगी, भारत में नहीं
गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी लगातार संविधान बचाने की बात करते हैं और इसी संदर्भ में उन्होंने सोनिया गांधी की किताब को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि किताब से अंश हटाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
गहलोत ने सोनिया गांधी के राजनीतिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में उनके व्यक्तित्व और काम को लेकर व्यापक चर्चा रही है।
आरएसएस के आरोपों पर भी प्रतिक्रिया
आरएसएस के मुखपत्र में यूपीए सरकार के दौरान सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली नेशनल एडवाइजरी काउंसिल (NAC) को लेकर की गई टिप्पणी पर भी गहलोत ने प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग संविधान का विरोध करते रहे हैं, वही इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। गहलोत ने कहा कि आजादी के बाद संविधान को लेकर विरोध करने वालों का इतिहास भी देखा जाना चाहिए।
NAC के काम गिनाते हुए बोले- अधिकार आधारित युग की शुरुआत हुई
गहलोत ने सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली NAC के कामों का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें कई सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे और उनके माध्यम से कई महत्वपूर्ण अधिकार आधारित कानूनों को आगे बढ़ाया गया।
उन्होंने शिक्षा का अधिकार (RTE), सूचना का अधिकार (RTI) और खाद्य सुरक्षा कानून जैसे प्रावधानों का जिक्र करते हुए कहा कि NAC ने देश में अधिकार आधारित व्यवस्था को मजबूत करने में भूमिका निभाई।
गहलोत ने राजस्थान में अपनी सरकार के दौरान सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली NAC से प्रेरणा लेकर राजस्थान में सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में कई काम किए गए, जिनकी देशभर में चर्चा हुई।




