जापान में ब्याज दर 31 साल के उच्चतम स्तर पर: 1% से बढ़ाकर 1.25% की गई, येन और महंगाई पर नजर
जापान में ब्याज दर 31 साल के उच्चतम स्तर पर, 1% से बढ़ाकर 1.25%

जापान के केंद्रीय बैंक बैंक ऑफ जापान (BOJ) ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी करते हुए इसे 1% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है। यह दर 1995 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। केंद्रीय बैंक के इस फैसले का उद्देश्य बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के साथ कमजोर पड़ रही जापानी मुद्रा येन को सहारा देना है।
जापान में लंबे समय तक बेहद कम और यहां तक कि नकारात्मक ब्याज दरों की नीति रही है। 2024 तक देश की नीति दर -0.1% तक थी। इसके बाद केंद्रीय बैंक ने धीरे-धीरे मौद्रिक नीति को सख्त किया है।
ब्याज दर बढ़ाने के पीछे क्या वजह?
1. महंगाई पर नियंत्रण
ब्याज दर बढ़ने से बैंक से कर्ज लेना महंगा हो जाता है। इसका असर कंपनियों और उपभोक्ताओं की उधारी तथा खर्च पर पड़ सकता है। केंद्रीय बैंक इसी माध्यम से अर्थव्यवस्था में मांग और कीमतों के दबाव को नियंत्रित करने की कोशिश करता है।
2. कमजोर येन को सहारा
जापानी येन लंबे समय से दबाव में रहा है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी से जापानी परिसंपत्तियां निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत आकर्षक हो सकती हैं। इससे येन पर दबाव कम करने में मदद मिलने की उम्मीद रहती है।
3. ऊर्जा कीमतों का असर
जापान अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। तेल और गैस की कीमतों में तेजी होने पर कमजोर येन के कारण आयातित ऊर्जा और महंगी हो सकती है। इसका असर घरेलू कीमतों पर पड़ सकता है।
जापान में महंगाई की स्थिति
जापान में अगस्त की कोर महंगाई दर 1.7% बताई गई है, जो जुलाई के 1.8% से थोड़ी कम है। यह बैंक ऑफ जापान के करीब 2% के महंगाई लक्ष्य के आसपास है।
हालांकि जापान के लिए मौजूदा महंगाई का संदर्भ दूसरे देशों से अलग है। देश ने लंबे समय तक डिफ्लेशन यानी कीमतों में लगातार गिरावट का दौर देखा है। अब कीमतों में बढ़ोतरी और जीवन-यापन की लागत में बदलाव जापानी परिवारों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।
2024 तक निगेटिव थी ब्याज दर
जापान दुनिया की उन प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में रहा है, जहां लंबे समय तक ब्याज दरें बेहद कम रखी गईं। 2024 तक बैंक ऑफ जापान की नीति दर नकारात्मक थी।
इसके बाद BOJ ने अपनी नीतियों में बदलाव शुरू किया। मौजूदा बढ़ोतरी इस बदलाव की अगली कड़ी है और इससे जापान की मौद्रिक नीति पहले की तुलना में अधिक सख्त होने का संकेत मिलता है।
कमजोर येन से क्या परेशानी?
किसी देश की मुद्रा कमजोर होने पर आयात महंगा हो जाता है। जापान जैसे आयात-निर्भर देश में इसका असर विशेष रूप से ऊर्जा, कच्चे माल और अन्य आयातित वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है।
येन की कमजोरी को लेकर जापानी अधिकारियों की चिंता भी बढ़ी है। मुद्रा बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव की स्थिति में सरकार और केंद्रीय बैंक द्वारा हस्तक्षेप की संभावना पर भी बाजार की नजर रहती है।
अमेरिका और यूरोप की नीतियों का भी असर
जापान की ब्याज दर नीति पर अमेरिकी ब्याज दरों और वैश्विक बॉन्ड बाजार की गतिविधियों का भी प्रभाव पड़ता है। अमेरिका, यूरोप और जापान की मौद्रिक नीतियों में अंतर रहने पर वैश्विक पूंजी का प्रवाह और मुद्रा विनिमय दरें प्रभावित हो सकती हैं।
इसी वजह से बैंक ऑफ जापान के फैसले का असर केवल जापानी अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक मुद्रा और वित्तीय बाजारों पर भी नजर रखी जाती है।
आगे क्या होगा?
अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि बैंक ऑफ जापान आने वाले महीनों में ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाता है। महंगाई, मजदूरी वृद्धि, आर्थिक गतिविधियां, ऊर्जा कीमतें और येन की विनिमय दर आगे के फैसलों में महत्वपूर्ण कारक रहेंगे।
ब्याज दर बढ़ने से जहां महंगाई और मुद्रा पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है, वहीं महंगी उधारी आर्थिक गतिविधियों और कंपनियों की निवेश योजनाओं को प्रभावित कर सकती है।
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