बीकानेर मेयर चुनाव में नवरतन डागा ने नाम वापस लिया, अब कांग्रेस-भाजपा में सीधा मुकाबला
बीकानेर मेयर चुनाव: नवरतन डागा ने नाम वापस लिया, कांग्रेस-भाजपा में सीधा मुकाबला

बीकानेर नगर निगम के महापौर चुनाव में कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान के बीच निर्दलीय प्रत्याशी नवरतन डागा ने अपना नामांकन वापस ले लिया है। डागा के पर्चा वापस लेने के बाद अब महापौर पद के लिए कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी अनिल कल्ला और भाजपा प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह शेखावत के बीच मुकाबला रह गया है।
डागा ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से मुलाकात के बाद नाम वापस लेने पर सहमति जताई। नामांकन वापस लेने के बाद उन्होंने पार्टी के साथ रहने और लोकतांत्रिक व्यवस्था की बात कही।
कांग्रेस के सामने थी अंदरूनी चुनौती
बीकानेर नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ने 42 वार्डों में जीत दर्ज की है, जबकि भाजपा के खाते में 27 सीटें आई हैं। 10 निर्दलीय पार्षद भी चुनाव जीते हैं।
कांग्रेस ने अनिल कल्ला को अधिकृत प्रत्याशी बनाया था। इससे नाराज नवरतन डागा ने 16 सितंबर को निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया था। उस समय उनके नामांकन से महापौर चुनाव में तीन प्रत्याशियों की स्थिति बन गई थी।
अब डागा के नाम वापस लेने के बाद मुकाबला दो प्रमुख दलों के प्रत्याशियों के बीच रह गया है।
डोटासरा से मुलाकात के बाद बदला रुख
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार डागा की प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से मुलाकात हुई थी। इसके बाद उन्होंने अपना निर्दलीय नामांकन वापस ले लिया।
नाम वापसी के दौरान कांग्रेस के स्थानीय नेताओं की मौजूदगी भी रही। कांग्रेस नेताओं ने डागा के वापस पार्टी के साथ आने को संगठन की एकजुटता से जोड़कर देखा।
21 सितंबर को होगा महापौर चुनाव
बीकानेर नगर निगम के महापौर पद के लिए मतदान 21 सितंबर 2026 को नगर निगम परिसर में होगा। मतदान के बाद उसी दिन परिणाम घोषित किया जाना है। इसके बाद 22 सितंबर को उपमहापौर पद के लिए चुनाव प्रस्तावित है।
अब चुनाव में कांग्रेस की ओर से अनिल कल्ला और भाजपा की ओर से सुरेंद्र सिंह शेखावत आमने-सामने हैं।
बीडी कल्ला ने लगाए दबाव के आरोप
पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता डॉ. बीडी कल्ला ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार चुनाव को प्रभावित करने के लिए अधिकारियों और जांच एजेंसियों के जरिए कांग्रेस पार्षदों पर दबाव बना रही है। उन्होंने विशेष रूप से जैसलमेर में कांग्रेस पार्षदों के प्रशिक्षण शिविर से जुड़ी कार्रवाई का उल्लेख किया।
ये आरोप कांग्रेस नेता की ओर से लगाए गए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कल्ला ने इस मामले को लेकर जिला कलेक्टर को ज्ञापन देने की बात भी कही।
भाजपा अपने पार्षदों के साथ कर रही बैठकें
दूसरी ओर भाजपा ने अपने पार्षदों को एकजुट रखने के लिए प्रयास तेज किए हैं। स्थानीय रिपोर्टों में भाजपा के कुछ पार्षदों के प्रत्याशी चयन को लेकर असहमति जताने की बात सामने आई है। हालांकि इन आंतरिक मतभेदों का अंतिम चुनावी परिणाम पर क्या असर होगा, यह 21 सितंबर के मतदान के बाद ही स्पष्ट होगा।
बीकानेर में अब महापौर चुनाव की तस्वीर साफ हो चुकी है। कांग्रेस के 42 पार्षदों के बहुमत के बीच भाजपा भी अपने प्रत्याशी के पक्ष में समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। अंतिम फैसला निगम के पार्षदों के मतदान से होगा।
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